आधुनिक प्रक्रिया पर ओरल एंडोस्कोपिक मायोटोमी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया | Doonited.India

June 27, 2019

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आधुनिक प्रक्रिया पर ओरल एंडोस्कोपिक मायोटोमी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया

आधुनिक प्रक्रिया पर ओरल एंडोस्कोपिक मायोटोमी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया
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देहरादून: अपनी तरह की पहली और आधुनिक प्रक्रिया पर ओरल एंडोस्कोपिक मायोटोमी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर मैक्स अस्पताल देहरादून एक बार फिर से विभिन्न जटिल बीमारियों के इलाज एवं प्रबंधन के लिए उत्तरी भारत के सबसे आधुनिक स्वास्थ्यसेवा प्रदाता केे रूप में उभरा है।

मैक्स अस्पताल के डाॅ रविकांत गुप्ता, डाॅ मयंक गुप्ता और वाईस प्रेजीडेन्ट-आॅपरेशन्स एवं युनिट हैड डाॅ. संदीप सिंह तंवर ने निगलने से सम्बधित समस्याओं तथा ईसोफेगस फूड पाईप की समस्याओं के इलाज केे लिए इस आधुनिक तकनीक के बारे में लोगों को प्रेस कांफ्रेंस के द्वारा जानकारी दी। मामलाएक दुर्लभ बीमारी एकेलसिया कार्डिया के चलते 60 वर्षीय महिला के लिए खाना और पानी निगलना मुश्किल हो गया था, हाल ही में ओपन सर्जरी के बजाए एंडोस्कोपी से उनका इलाज किया गया।

इस बुजुघ्र्ग महिला को पिछले 4-5 सालों से यह परेशानी थी और फूड पाईप की ‘ब्लाॅकेज’ दूर करने के लिए ओपन सर्जरी ही एकमात्र विकल्प था। एकेलसिया ऐसी स्थिति है जिसमें ईसोफेगस (फूड पाईप) की स्मूद मसल्स (चिकनी मांसपेशियां) काम करना बंद कर देती हैं। इसका कारण अब तक ज्ञात नहीं है। इसके चलते ईसोफेगस का स्फिंक्टर बंद हो जाता है, जिससे मरीज को खाना और पानी निगलने में परेशानी होती है और वह स्पाज्म जैसा दर्द महसूस करता है। ईसोफेगस में म्युकोसा और मांसपेशियांे की परत के बीच एक टनल बनाई जाती है जो पेट तक जाती है। ऐसा एक विशेष चाकू की मदद से एंडोस्कोप के द्वारा किया जाता है। इसके बाद रूकावट को दूर करने के लिए मांसपेशियों की परत को काटा जाता है। टनल की ओपनिंग को क्लिप की मदद से बंद कर दिया जाता है।

इस प्रक्रिया से ब्लाॅकेज रुकावट दूर हो जाती है और ईसोफेगस से पेट तक खाना सामान्य तरीके से जानेे लगता है। इस प्रक्रिया में आमतौर पर 2 घण्टे लगते हैं और मरीज 24 घण्टे के अंदर घर लौट सकता है। सर्जरी के बजाए एंडोस्कोपिक प्रक्रिया केे कई फायदे हैं, इससे मरीज को निगलने की परेशानी से आराम मिलता है। इस प्रक्रिया में छाती या पेट पर चीरा लगाने की जरूरत नहीं होती और प्रक्रिया के बाद मरीज को कम समय के लिए अस्पताल में रुकना पड़ता है।

वर्तमान में भारत में कुछ ही ऐसे केन्द्र हैं जो निगलने से संबंधित परेशानियों के लिए कम इनवेसिव दृष्टिकोण का इस्तेमाल करते हैं। इस तकनीक को सबसे पहले जापान में किया गया और पिछले एक-दो सालों से संयुक्त राज्य अमेरिका में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। आमतौर पर एंडोस्कोप का इस्तेमाल नैदानिक उपकरण के रूप में किया जाता है, इसकी मदद से बायोप्सी कर बीमारी का पता लगाया जाता है। लेकिन आजकल हम एंडोस्कोप की मदद से फूड पाईप की दीवार को भेद कर ऐसी कई प्रक्रियाओं को आसानी से करने लगे हैं, जिनके लिए पहले ओपन सर्जरी करनी पड़ती थी। इस तरह की प्रक्रिया को करने के लिए डाॅक्टर को मेहनत एवं अनुभव की जरूरत होती है।

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