कश्‍मीर से पाकिस्‍तान भी बेचैन | Doonited.India

December 11, 2019

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कश्‍मीर से पाकिस्‍तान भी बेचैन

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कश्मीर जा सकते हैं अजित डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल कथित तौर पर क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति का जायजा लेने के मद्देनजर जम्मू एवं कश्मीर की यात्रा कर सकते हैं। हालांकि, जम्मू एवं कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करके विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने के बाद तीनों सेनाएं किसी भी नतीजे से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।

राज्य के पुनर्गठन के निर्णय के क्रम में, डोभाल ने स्थिति की समीक्षा की, जिसके बाद राज्य प्रशासन के अधिकारियों के साथ उन्होंने बैठकें करने के बाद अतिरिक्त सैनिकों को कश्मीर घाटी भेजा। डोभाल के दौरे के बाद संभावना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी संसद सत्र के खत्म होने के बाद घाटी का दौरा कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार सेना, वायुसेना और नौसेना को हाई स्टेट ऑफ अल्र्ट पर रखा गया है।
भारत के नेशनल सिक्योरटी एडवाइजर अजित डोभाल ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष नासिर खान जंजुआ से कल फ़ोन पर बात की. उन्होंने दो टूक शब्दो में जंजुआ से कहा है कि भारत को अपने हितों की रक्षा करने का अधिकार हैं.

बातचीत के दौरान उन्होंने अपने पाकिस्तानी समकक्ष के साथ भारत द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक से सम्बंधित अहम जानकारियां शेयर की. सूत्रों के अनुसार डोभाल ने बातचीत में पाकिस्तान को आड़े हाथो लेते हुए कहा कि पाकिस्तान द्वारा पठानकोट में हुए हमले पर ठोस कार्रवाई न करने की वजह से उनका पाकिस्तान पर विश्वास घटा हैं. उन्होंने ये भी कहा कि भविष्य में भी भारत अपनी रक्षा के लिए और सर्जिकल स्ट्राइक्स को अंजाम दे सकता हैं.

हालांकि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज का कहना है कि दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने को लेकर रज़ामंद हुए है. भारत में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर अब्दुल बासित ने कहा है कि दोनों ही देश ये समझते है कि जंग हमारी समस्याओं का समाधान नहीं है. दोनों देश परमाणु ताकत संपन्न है जिनके बीच संघर्ष की कोई जगह नहीं है.

भारत सरकार का इस निर्णय पर दृढ़ मत है कि यह देश का आंतरिक मामला है लेकिन नई दिल्ली पाकिस्तान की प्रतिक्रियाओं पर नजर बानाए हुई है।

नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अन्य क्षेत्रों पर पाकिस्तानी सेना की प्रतिक्रियाओं पर करीब से नजर रखी जा रही है। पिछले कुछ दिनों में नियंत्रण रेखा पर भारी गोलाबारी हुई है। भारतीय सेना ने इससे पहले अपनी पोस्ट पर पाकिस्तान की बॉर्डर एक्शन टीम (बैट) की एक रेड को नाकाम कर दिया और दुश्मन देश के पांच सैनिकों को मार गिराया। बलों को जवाबी कार्रवाई का अंदेशा है, लेकिन उनका कहना है कि वह हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं। कश्मीर घाटी में जमीनी हालात की कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि वहां संचार माध्यम ठप हैं।

जम्मू और कश्मीर में हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या असंतुलन है?

मोदी सरकार ने सोमवार को एक ही जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा प्रदान करने वाली धारा-370 को खत्म कर दिया। इसके तुरंत बाद राजनीतिक, सैन्य एवं कूटनीतिक विशेषज्ञों के बयान आने लगे। किसी ने इस फैसले के पीछे आतंकवाद को सबसे बड़ा कारण बताया तो कोई इसे राजनीतिक मुद्दा कहता रहा। भाजपा के अलावा कुछ विशेषज्ञों की बात करें तो धारा 370 को खत्म करने के पीछे जम्मू-कश्मीर का जनसंख्या असंतुलन यानी हिंदू-मुस्लिम की संख्या, बड़ी वजह रही है। जनगणना 2011 के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में हिंदू आबादी करीब 36 लाख है, जबकि मुस्लिमों की संख्या 86 लाख बताई गई है। जम्मू-कश्मीर की भाजपा इकाई के नेता जो पिछले सप्ताह दिल्ली में हुई कोर कमेटी की बैठक में मौजूद थे, का कहना है, जेएंडके का सम्पूर्ण विकास धारा-370 के चलते नहीं हो सका है। इसके चलते घाटी का विकास बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 

यह किसी से छिपा नहीं है कि घाटी में आतंकवाद को कौन समर्थन दे रहा है। अलगाववादी नेता अभी तक क्या करते रहे, क्या सब लोग यह नहीं जानते हैं। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट देख लें तो पता चल जाएगा कि सीमा पार के आतंकी संगठनों के मददगार कौन हैं। पत्थरबाजों को कौन प्रोत्साहन दे रहा है, इनका जवाब जांच एजेंसियां अदालत में भी दे चुकी हैं।

एक ही धर्म के लोगों को नौकरी और प्राइवेट काम धंधा मिल रहा है। यह सब हिंदू-मुस्लिमों के जनसंख्या असंतुलन का नतीजा है। नाम न छापने की शर्त पर भाजपा नेता बोले, देखो भाई, हमारी पार्टी चाहती है कि हर समुदाय का बराबर विकास हो। इसके लिए हम काम कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में अभी तक एक ही समुदाय शासन प्रशासन में अपना दखल रखता रहा है।

जनगणना 2011 के अनुसार जम्मू-कश्मीर में विभिन्न समुदायों की आबादी

क्षेत्र हिंदू मुस्लिम सिख इसाई बौद 
जम्मू 3364618 1799232 176635 22512 3093
कश्मीर घाटी 168833 6640957 55950 11857 730
लद्दाख 33223 127396 2263 1262 108761

नोट: इनके अलावा जम्मू-कश्मीर में जैन समुदाय के भी करीब 400 लोग रहते हैं। साथ ही 25 हजार से ज्यादा कुछ ऐसे लोग भी हैं, जिनके धर्म का उल्लेख नहीं है। जम्मू-कश्मीर में रह रहे करीब 11 लाख लोगों को अभी तक नागरिकता नहीं मिल सकी है। रक्षा विशेषज्ञ कमर आगा कहते हैं, धारा-370 खत्म होने से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद पर नकेल कसने में मदद मिलेगी। साथ ही घाटी का विकास पहले से कहीं ज्यादा तेजी के साथ होगा। 

नए लोगों को वहां जाने का मौका मिलेगा। ऐसा नहीं है कि कश्मीर में रहने वाले सभी लोगों का एक समान विकास हुआ है। गुर्जर और पहाड़ी जैसे कई समुदाय, जो विकास रेखा से अभी तक दूर रहे हैं, वे आज खुश हैं। आज भी करीब 11 लाख लोग वहां पर ऐसे हैं, जिन्हें जेएंडके की नागरिकता नहीं मिल सकी है। यह अलग बात है कि वे लोग कई दशकों से वहां पर रह रहे हैं।

धारा 370 खत्म होने के बाद अब इन लोगों को वहां की नागरिकता मिल जाएगी। बॉर्डर के आसपास सुरक्षा बलों के रिटायर लोगों को बसाया जा सकता है। पंडितों की वापसी का रास्ता भी अब प्रशस्त हो जाएगा। कमर आगा ने कहा, जम्मू-कश्मीर के चार-पांच जिलों को छोड़ दें तो बाकी जगह के लोगों का धारा-370 खत्म करने के लिए केंद्र सरकार को समर्थन रहा है।

कश्मीर पर भारत के कदम से क्षेत्र की शांति समाप्त होगी : इमरान खान

जम्मू एवं कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने और अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के भारत सरकार के फैसले को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने गैर-कानूनी बताया और कहा कि इससे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा नष्ट हो जाएगी। इमरान ने यह बयान अपने मलेशियाई समकक्ष महाथिर बिन मोहम्मद के साथ जम्मू एवं कश्मीर की वर्तमान स्थिति पर बातचीत के दौरान दिया।

बातचीत के दौरान इमरान ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर की स्थिति में बदलाव संयुक्त राष्ट्र संकल्पों का उल्लंघन है। जियो न्यूज के अनुसार, इमरान ने मलेशियाई प्रधानमंत्री से कहा, “भारत के इस कदम से परमाणु संपन्न पड़ोसियों के बीच संबंध और बिगड़ेंगे।” मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने कहा कि मलेशिया स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पाकिस्तान के संपर्क में है।

इसके पहले भारत सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया, जो जम्मू एवं कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करता था।

भारत के इस निर्णय की पाकिस्तान ने निंदा की है और घोषणा की है कि इस मुद्दे को देश में दौरे पर आ रहे अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ बैठकों के दौरान उठाया जाएगा।

कश्‍मीर में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती से पाकिस्‍तान भी बेचैन

जम्मू एवं कश्मीर में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती ने पाकिस्तान को बेचैन कर दिया है। पाकिस्तान की बेचैनी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने कहा है कि वह इस मामले को पूरी दुनिया के सामने उठाएगा। पाकिस्तानी मीडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार  विदेश मंत्रालय में जम्मू एवं कश्मीर मामलों की संसदीय समिति की पांचवीं बैठक के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारतीय कार्यवाही पर सवाल उठाया।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, भारत की युद्ध मनोदशा चिंताजनक है। उन्होंने दस हजार और सैनिक कश्मीर में भेजे हैं। वे मानवाधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं। पाकिस्तान इस मुद्दे को पूरी दुनिया के सामने उठाएगा। भारत वार्ता के लिए तैयार नहीं है और न ही किसी और की मध्यस्थता के लिए तैयार है।

यह एक विचित्र स्थिति है। उन्होंने कहा कि भारत, कश्मीर की संवैधानिक स्थिति को बदलना चाहता है और पाकिस्तान ऐसा होने नहीं देगा। हम पूरी दुनिया में विदेश मामलों की संसदीय समितियों के समक्ष कश्मीर मुद्दा उठाने की योजना बना रहे हैं।

उन्होंने कहा, नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम के लगातार उल्लंघन से भारत के शत्रुतापूर्ण रवैये का खुला सबूत मिलता है जो क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि कश्मीर मामले में पूरे देश और संसद का रुख एक समान है।

इससे पहले जम्मू एवं कश्मीर मामलों की संसदीय समिति की पांचवीं बैठक में शाह महमूद कुरैशी ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान के अमेरिका दौरे की जानकारी दी। उन्होंने समिति के सदस्यों को बताया कि प्रधानमंत्री ने वहां कश्मीर के मुद्दे को प्रभावी तरीके से उठाया जिसमें कश्मीर में बहुत बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला भी शामिल था।

 

 संविधान के अनुच्छेद 370 को खत्म करने के केंद्र के फैसले के बाद जम्मू एवं कश्मीर राज्य का स्वरूप कुछ इस तरह होगा। जम्मू एवं कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 :

 

– केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख का गठन होगा

– इसमें कारगिल और लेह जिले शामिल होंगे

– केंद्र शासित प्रदेश जम्मू एवं कश्मीर का गठन होगा

– इसमें लद्दाख और लेह के अलावा बाकी सभी इलाके शामिल होंगे।

राज्यपाल का दर्जा :

– मौजूदा जम्मू एवं कश्मीर राज्य के राज्यपाल अब केंद्र शासित जम्मू एवं कश्मीर और केंद्र शासित लद्दाख के उपराज्यपाल होंगे।

राज्यसभा में प्रतिनिधित्व :

– जम्मू एवं कश्मीर के चार मौजूदा राज्यसभा सदस्य केंद्र शासित जम्मू एवं कश्मीर के सदस्य होंगे। उनके कार्यकाल यथावत रहेंगे।

लोकसभा में प्रतिनिधित्व :

– केंद्र शासित जम्मू एवं कश्मीर में पांच लोकसभा सीटें होंगी।

– केंद्र शासित लद्दाख में एक लोकसभा सीट होगी।

उपराज्यपाल, जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा :

– केंद्र शासित पुडुचेरी के लिए लागू अनुच्छेद 239ए में मौजूद प्रावधान केंद्र शासित जम्मू एवं कश्मीर के लिए भी लागू होंगे।

– विधानसभा में प्रत्यक्ष चुनाव वाली 107 सीटें होंगी। (जम्मू एवं कश्मीर विधानसभा में पहले 111 सीटें थीं, जिनमें से 87 के लिए चुनाव होते थे।)

– पाकिस्तानी कब्जे वाली 24 सीटें खाली रहेंगी (पहले की विधानसभा में जिस तरह खाली रहती थीं।)

– उपराज्यपाल विधानसभा में दो महिला सदस्यों को नामित कर सकते हैं।

– विधानसभा का कार्यकाल पांच साल होगा (पहले छह साल था)।

– केंद्रीय कानून केंद्र शासित जम्मू एवं कश्मीर और लद्दाख में लागू होंगे।

सरकार ने विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन का प्रस्ताव किया :

– विधानसभा सीटों का पुनर्गठन होगा और सीटों के नक्शे तैयार किए जाएंगे।

– फिलहाल जम्मू क्षेत्र में 37 विधानसभा सीटें हैं और कश्मीर में 46 सीटें।

अनुच्छेद 370 ने क्या रोक रखा था :

– सूचना का अधिकार का क्रियान्वयन।

– शिक्षा का अधिकार।

– नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की जांच।

– कश्मीर में महिलाओं के लिए शरिया कानून से आजादी।

– पंचायतों को अधिकार।

– हिंदू और सिख अल्पसंख्यकों के लिए 16 प्रतिशत आरक्षण।

– देश के अन्य राज्यों के नागरिकों को कश्मीर में जमीन खरीदने या जमीन का स्वामित्व रखने से।

– कश्मीर की भारतीय महिलाओं से शादी करने वाले पाकिस्तानियों को भारतीय नागरिकता लेने से।

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Post source : various agencies

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