चुनाव 2019: गडकरी का जनता पिटाई करेगी वाला बयान, क्या है इसका मतलब? | Doonited.India

February 17, 2019

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चुनाव 2019: गडकरी का जनता पिटाई करेगी वाला बयान, क्या है इसका मतलब?

चुनाव 2019: गडकरी का जनता पिटाई करेगी वाला बयान, क्या है इसका मतलब?
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कभी भाजपा के अध्यक्ष रहे नितिन गडकरी ने पिछले कुछ समय में लगातार ऐसी बातें कही हैं जो आम तौर पर सत्ताधारी दल के मंत्री नहीं करते. उन्होंने कहा है कि वादे वही करने चाहिए जिन्हें पूरा किया जा सके, वर्ना जनता पिटाई कर सकती है. इस बयान को नरेंद्र मोदी के चुनावी वादों से जोड़कर देखा जा रहा है. इससे पहले दिसंबर में पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम के आने के बाद उन्होंने पार्टी के नेतृत्व पर दो टिप्पणियां की थीं.

23 दिसंबर को उन्होंने पुणे में कहा कि “नेतृत्व को जीत का श्रेय और हार की ज़िम्मेदारी दोनों लेनी चाहिए.”

इसके दो दिन बाद दिल्ली में ख़ुफ़िया अधिकारियों की बैठक में उन्होंने कहा कि “अगर मैं पार्टी अध्यक्ष हूं और मेरे सांसद और विधायक ठीक से काम नहीं कर रहे हैं तो यह किसी और की नहीं, मेरी ही ज़िम्मेदारी होगी.” ज़ाहिर है, इस बयान को मौजूदा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से जोड़कर देखा जा रहा है.

कुछ समय पहले उनका एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वे फ़िल्म अभिनेता नाना पाटेकर से मराठी में हंसते हुए यह कहते हुए दिखे थे कि “हमने वादे तो कर दिए थे, हमें क्या पता था कि हम सत्ता में आ जाएंगे और वादे पूरे करने होंगे.”

बाद में गडकरी ने इसका खंडन किया था, यह एक बड़े वीडियो का एक छोटा-सा हिस्सा था, उनका कहना था कि छोटे हिस्से के पूरे संदर्भ से काटकर दिखाया जा रहा है जिसके कुछ और धारणा बनती है.

क्या है इसका मतलब?

कई राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मोदी को स्पष्ट बहुमत न मिलने की हालत में गडकरी शीर्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं.

भूतल परिवहन मंत्री के तौर पर नितिन गडकरी को सक्षम मंत्रियों में गिना जाता है और उनके पास गिनाने के लिए कई उपलब्धियां हैं, उन्होंने कहा भी “मैं डंके की चोट पर वादा करता हूँ और उसे पूरा करके दिखाता हूं.”

नितिन गडकरी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं. उनके पास उमा भारती के तबादले के बाद जल संसाधन मंत्रालय का भी प्रभार है.

वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह ने बीबीसी हिंदी के एक लेख में लिखा था कि बीजेपी का ‘160 क्लब’ फिर से सक्रिय हो गया है, यह उनका लोगों का गुट है जो मोदी के नेतृत्व में 160 या उससे कम सीटें आने की स्थिति में सत्ता परिवर्तन का राग छेड़ेगा.

नागपुर के रहने वाले मराठी ब्राह्मण नितिन गडकरी को संघ का प्रियपात्र माना जाता है, माना जाता है कि वे ये सारी बातें संघ की मर्ज़ी के खिलाफ़ जाकर नहीं कर रहे हैं.

प्रदीप सिंह बताते हैं कि जब नितिन गडकरी अध्यक्ष थे तब अमित शाह के बुरे दिन चल रहे थे, वे अदालत के आदेश पर गुजरात से बाहर कर दिए गए थे, लोग बताते हैं कि गडकरी अमित शाह को घंटों इंतज़ार के बाद मुलाकात का समय देते थे.

अमित शाह और नितिन गडकरी के बीच संबंध मधुर नहीं रहे हैं, मोदी-शाह के दौर में जब नितिन गडकरी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बनना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ, यही नहीं नागपुर के ही उनसे बहुत जूनियर देवेंद्र फड़नवीस को मुख्यमंत्री की गद्दी पर बिठाया गया.

गडकरी को संघ का समर्थन हासिल है और पार्टी के भीतर भी उनके लोगों से संबंध काफ़ी बेहतर हैं. अभी कहना मुश्किल है कि गडकरी किस हद तक बगावत करेंगे लेकिन वे खुद को मोदी-शाह के विश्वस्तों से अलग साबित करने में लगे हुए हैं.

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Post source : वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह बीबीसी हिंदी

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