Doonited केवल बयान देने, प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने, सोशल मीडिया के सहारे मोदी से नहीं लड़ा जा सकता है : कांग्रेसHappy Independence Day
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केवल बयान देने, प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने, सोशल मीडिया के सहारे मोदी से नहीं लड़ा जा सकता है : कांग्रेस

केवल बयान देने, प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने, सोशल मीडिया के सहारे मोदी से नहीं लड़ा जा सकता है : कांग्रेस
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ट्वीटर ,प्रेस कॉन्फ़्रेंस और बयान देने वाली कांग्रेस को पार्टी के वरिष्ठ सांसदों ने आइना दिखाते हुये सोनिया गांधी की मौजूदगी में साफ़ -साफ़ कहा कि पार्टी पूरी तरह मरी पड़ी है जनता के बीच उसका कोई वजूद नज़र नहीं आ रहा है।  नतीज़ा जनता कांग्रेस को मोदी के विकल्प के रूप में स्वीकार ने की मन स्थिति में नहीं है, जब बात कपिल सिब्बल, अभिषेक सिंघवी और पी चिदंबरम ने उठाई तो राजीव सातव, प्रताप वाजवा, अखिलेश सिंह, शक्ति सिंह गोहिल, नासिर हुसैन और पी एल पुनिया जैसे सदस्यों ने सोनिया गाँधी से मांग की कि राहुल गाँधी को तत्काल पार्टी अध्यक्ष की ज़िम्मेदारी दें, ताकि कांग्रेस आक्रामक ढंग से ज़मीन पर उतर कर संघर्ष कर सके।

अखिलेश सिंह और नासिर हुसैन ने तुरंत राहुल को अध्यक्ष बनाये जाने पर जोर दिया। सूत्र बताते हैं कि जिस समय यह युवा नेता राहुल के नाम पर अड़े थे उस समय आनंद शर्मा , अम्बिका सोनी, अहमद पटेल सरीखे नेताओं ने न तो राहुल का नाम लिया और न ही उसका विरोध किया। इन नेताओं ने स्वीकार किया कि नेतृत्व और दिशा विहीन कांग्रेस को मोदी से लड़ने के लिये ज़मीन पर उतरना होगा केवल बयान देने, प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने अथवा सोशल मीडिया के सहारे मोदी से नहीं लड़ा जा सकता है।

यह सही है कि लोगों में मोदी के प्रति नाराज़गी है लेकिन सोई कांग्रेस उसका फ़ायदा नहीं उठा पा रही है। कुछ राज्यसभा सदस्यों की शिकायत थी कि उनको राज्यसभा के कामों के अलावा कोई ज़िम्मेदारी नहीं दी जाती है। इस पर अहमद पटेल ने राज्यसभा सदस्यों को पार्टी में ज़िम्मेदारी देने का सुझाव रखा। राज्यसभा में कांग्रेस सांसदों की सोनिया द्वारा बुलाई गई इस बैठक में कोरोना, चीनी घुसपैठ,आर्थिक हालत जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में रिपुन बोरा, पीएल पूनिया, छाया वर्मा तथा कुछ अन्य सदस्यों ने राहुल को फिर से पार्टी की कमान सौंपने की पैरवी की। बैठक से अवगत एक सूत्र ने बताया, ”बोरा, पूनिया, छाया वर्मा और कुछ अन्य सदस्यों ने कहा कि मौजूदा समय में पार्टी कार्यकर्ताओं की भावना है कि राहुल गांधी को फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाए। इन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ही विपक्ष में इकलौती आवाज हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती दे रहे हैं।”

गत 11 जुलाई को सोनिया ने कांग्रेस के लोकसभा सदस्यों के साथ डिजिटल बैठक की थी और उसमें भी पार्टी के कई सांसदों ने राहुल गांधी को फिर से पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने की मांग की थी। गौरतलब है कि पिछले साल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद राहुल गांधी ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था।

इसके बाद सोनिया गांधी को पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष बनाया गया था। सोनिया की अगुवाई में हुई पार्टी के राज्यसभा सदस्यों की बैठक में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश और कई अन्य राज्यसभा सदस्य मौजूद थे।

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में कोरोना महामारी से संबंधित हालात, मौजूदा राजनीतिक परिस्थिति, लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था की स्थिति पर अपनी बात रखी। गौरतलब है कि राज्यसभा में कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 40 है, जबकि लोकसभा में पार्टी के सांसदों की संख्या 52 है।




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Post source : Agency

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