July 02, 2022

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मानसखंड कॉरिडोर : ड्रीम प्रोजेक्ट

मानसखंड कॉरिडोर  :  ड्रीम प्रोजेक्ट

 

मध्य हिमालयी क्षेत्र गढ़वाल और कुमाऊं को उत्तराखंड कहा गया है. पुराणों में गढ़वाल को केदारखंड तो कुमाऊं मंडल को मानसखंड के रूप में जाना जाता है. सरकार अब पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गढ़वाल के चार धाम की तर्ज पर कुमाऊं के मंदिरों को विकसित करना चाहती है. इसके लिए मानसखंड कॉरिडोर नाम से प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है, जिसे मंदिरमाला प्रोजेक्ट भी कहा जा रहा है. इसके तहत कुमाऊं के प्रमुख मंदिरों को बेहतर सड़कों से कनेक्ट किया जाएगा. गढ़वाल और कुमाऊं के बीच रोड कनेक्टिविटी भी सुधारी जाएगी.

 

मुख्य सचिव एसएस संधू इस प्रोजेक्ट की तैयारियों को लेकर एक मीटिंग कर चुके हैं, जिसमें सभी डीएम से तत्काल उनके जनपदों के प्रमुख मंदिरों और पर्यटन स्थलों की डिटेल्ड रिपोर्ट मांगी गई है. मंदिरों के साथ ही उन पर्यटन स्थलों को भी विकसित किया जाएगा, जिनकी पहचान व्यापक नहीं है लेकिन संभावनाएं हैं. लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव आरके सुधांशु ने बताया कि मानसखंड प्रोजेक्ट को लोक निर्माण विभाग और पर्यटन विभाग संयुक्त रूप से देखेंगे.

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हाल में चंपावत उपचुनाव के सिलसिले में रैली से पहले सीएम पुष्कर धामी ने गोल्ज्यू मंदिर कॉरिडोर को लेकर ट्वीट किया था, जो मंदिरमाला प्रोजेक्ट का ही एक हिस्सा होगा.

 

29 मंदिर और 19 रोपवे चिह्नित

सुधांशु के अनुसार प्रोजेक्ट के तहत कुमाऊं के गोलज्यू, पाताल भुवनेश्वर, कोट भ्रामरी, देवीधुरा, कैंचीधाम, बाल सुंदरी समेत 29 मंदरों को चिह्नित कर लिया गया है. कोशिश है कि जहां रोड कनेक्टिविटी नहीं हो सकती, वहां रोपवे लगाए जाएं. फर्स्ट फेज़ में करीब 19 रोपवे चिह्नित किए गए हैं. जो मंदिर चिह्नित किए जा चुके हैं, उनकी लिस्ट देखिए.

अल्मोड़ा : जागेश्वर महादेव, चितई गोलज्यू मंदिर, सूर्यदेव मंदिर, नंदादेवी मंदिर कसारदेवी मंदिर, झांकर सैम मंदिर
पिथौरागढ़ : पाताल भुवनेश्वर, हाटकालिका मंदिर, मोस्टमाणु मंदिर, बेरीनाग मंदिर, मलेनाथ मंदिर, थालकेदार मंदिर
बागेश्वर : बागनाथ महादेव, बैजनाथ मंदिर, कोट भ्रामरी मंदिर
चंपावत : पाताल रुद्रेश्वर गुफा, गोल्ज्यू मंदिर, निकट गोरलचौड मैदान, पूर्णागिरी मंदिर, बाराही देवी मंदिर, देवीधुरा मंदिर, रीठा मीठा साहिब मंदिर
नैनीताल : गोल्ज्यू मंदिर, नैनादेवी मंदिर, गर्जियादेवी मंदिर कैंचीधाम मंदिर, हनुमान मंदिर
ऊधमसिंह नगर : चैती (बाल सुंदरी) मंदिर, अटरिया देवी मंदिर व नानकमत्ता साहिब

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गढ़वाल में चारधाम रोड तो कुमाऊं में मानसखंड प्रोजेक्ट

प्रधानमंत्री मोदी उत्तराखंड दौरे पर कहते रहे हैं कि इस सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा. इन दोनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं को इस दिशा में बढ़ाया गया कदम माना जा रहा है क्योंकि ये दोनों ही प्रोजेक्ट उत्तराखंड के पर्यटन विकास के लिए मील के पत्थर से कम नहीं हैं. मानसखंड कॉरीडोर वही प्रोजेक्ट है, जिसका वादा चुनाव से पहले बीजेपी ने अपने विजन डाक्यूमेंट में भी किया था.

तो यह मानसखंड कहां से कहां तक है?

उत्तराखंड में मानसखंड का ज़िक्र पश्चिम में नंदा देवी पर्वत से पूर्व में नेपाल स्थित काकगिरि पर्वत तक मिलता है. 1881 में अंग्रेज़ अधिकारी एडविन टी ऐटकिंसन ने हिमालयी ज़िलों का जो गजेटियर (Gazetteer of the Himalayan Districts of the North-Western Provinces) तैयार किया था, उसमें भी मानसखंड का ज़िक्र है. वर्तमान में इसकी भारतीय सीमा महाकाली नदी तक है. काली कुमाऊं मानसखंड का अंतिम बिंदु है.

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