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मैड ने एयरपोर्ट विस्तार परियोजना के प्रति विरोध जताया

मैड ने एयरपोर्ट विस्तार परियोजना के प्रति विरोध जताया
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देहरादून के शिक्षित छात्रों के संगठन, मेकिंग ए डिफरेंस बाय बींग द डिफरेंस (मैड) संस्था ने एयरपोर्ट विस्तार परियोजना के प्रति विरोध जताया है। पिछले कुछ दिनों से संस्था के सदस्य निरंतर थानों क्षेत्र में रह रहे आमजन के साथ मिलकर एक रिपोर्ट तैयार कर रहे है। वन विभाग की रिपोर्ट को झूठलाते हुए कुछ साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं, प्रोजेक्ट की एनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक संविधानिक अनुसूची के अनुच्छेद 1 फौना इस क्षेत्र में नहीं पाया जाता, जबकि मैड संस्था द्वारा इस तथ्य को प्रमाण के साथ झूठला दिया गया हैं।


मैड संस्था कैसी भी विस्तार नीती के विरुद्ध नहीं है तथा यह चाहती है कि एयरपोर्ट का विस्तार जंगल ना काटते हुए उचित विकल्पों के साथ किया जाए, तथा सतत विकास का भी पूर्ण रुप से ध्यान रखा जाए। पिछले कुछ दिनों से संस्था के सदस्य सरकारी विभागों के साथ निरंतर संपर्क में रहे हैं तथा हर पक्ष को यही समझाने की कोशिश करते आ रहे हैं की उत्तराखंड राज्य के लिये उत्तराखंड की जैव विविधता अहम भूमिका निभाती आई है, और किसी भी तरीके से इसे क्षति पहुंचाना उत्तराखंड व देहरादून दोनों के लिए ही बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। ऐसे बहुत से उदाहरण सामने प्रस्तुत है।



जहां पर्यावरण से छेड़छाड़ के परिणाम गंभीर रूपो में सामने आ रहें, मैड संस्था देहरादून शहर में ऐसा नहीं होने देना चाहती। देहरादून में काम कर रही सभी संस्थाओं के साथ मिलकर मैड संस्था ने सरकार को यह भी चेतावनी दी है कि यदि इस परियोजना पर दोबारा से विचार नहीं किया गया और जंगलों को संरक्षित करने हेतु उचित नीति नहीं बनाई गई तो संस्था व्यापक स्तर पर अभियान चलाएगी, साथ ही जमीनी स्तर पर आमजनमानस को जागरूक करते हुए यह भी अपील करेगी कि अगला जनप्रतिनिधि व ऐसा चुने जो पर्यावरण के परिपेक्ष में काम कर सके।

चार धाम प्रोजेक्ट की वजह से कुछ कम बर्बादी उत्तराखंड नें नहीं देखी है पर लगता है जैसे उत्तराखंड सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता।


कोरोना ने जहां हम सब को घरों में कैद किया तो वहीं दूसरी तरफ प्रकृति को कहीं ना कहीं मानवीय कृत्यों स्वतंत्र भी किया, यदि करोना कि यह स्थिति हमें घर ना बैठाती तो उत्तराखंड के जंगलों में हजारों कुल्हाड़ीया अब तक चल गयी होती।


हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने जौलीग्रांट एयरपोर्ट का विस्तार करने हेतु एक प्रोजेक्ट प्रस्तावित किया जिसके तहत 10,000 पेड़ों का कटाव अनिवार्य है। इस प्रस्ताव को मंजूरी का ठप्पा लगवाने हेतु उत्तराखंड सरकार ने राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Wildlife Board) अनुमोदन प्राप्त किया जिसके तहत राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड 243 एकड़ वन्य जमीन भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airport Authority of India) को देने के लिये तैयार है।





जो क्षेत्र एयरपोर्ट का विस्तार करने के लिए प्रस्तावित किया गया है वह राजाजी नेशनल पार्क इको सेंसेटिव जोन के 10 किलोमीटर के अर के भीतर पड़ता है, और यदि इतनी भारी मात्रा में जंगलों का कटाव होता है तो इसका सीधा सीधा असर वन्यजीवों पर पड़ेगा, एक तरह से उत्तराखंड के वन्य जीव मानवीय कृत्यों के कारण विलुप्ती की कगार पर पहुंच जाएंगे।
उत्तराखंड जो कि अपने जल जंगल जमीन के लिए जाना जाता है , ऐसे विकासो के नाम पर इसे रेत-गारे तले दबाने को पूरी तरह से सज्जे है।


प्रशासन को नींद से जगाना अनिवार्य है अनिवार्य है जिसके लिए आम नागरिकों को ही आगे आना होगा ऐसे कृत्यों का पुरजोर विरोध करना होगा, ताकि सरकार तो क्या कोई भी हमारे पर्यावरण के साथ खिलवाड़ ना कर सके।


आखिरकार यह पर्यावरण हमारा है तो इसे संरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी हमारी ही बनती है,बस जरूरत है तो एकजुटता और जागरूकता की। इसी को मद्देनजर रखते हुए मैड संस्था अपने पर्यावरण को बचाने की मुहिम लेते हुये हर संभव प्रयास को तत्पर है।



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