सरकार ने अनुच्छेद 370 को नहीं, उसके प्रावधानों को रद्द किया : कानून विशेषज्ञों की राय | Doonited.India

December 11, 2019

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सरकार ने अनुच्छेद 370 को नहीं, उसके प्रावधानों को रद्द किया : कानून विशेषज्ञों की राय

सरकार ने अनुच्छेद 370 को नहीं, उसके प्रावधानों को रद्द किया : कानून विशेषज्ञों की राय
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पूर्व महाधिवक्ता हरीश साल्वे का कहना है कि सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को नहीं, बल्कि अनुच्छेद 35ए सहित उसके प्रावधानों को समाप्त किया है। साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट में मीडिया से बातचीत में कहा, “अनुच्छेद 370 कहता है कि उसके तहत प्रावधानों को राष्ट्रपति के आदेश के जरिए लागू किया जाएगा। 1954 में राष्ट्रपति के आदेश के जरिए अनुच्छेद 35ए को संविधान में शामिल किया गया था। आज उसी आदेश को रद्द किया गया है।”

राज्य की सीमाओं को फिर से निर्धारित करने या राज्य के पुनर्गठन पर सरकार के विधेयक पर साल्वे ने कहा, “राज्य को दो भागों में बांटने से संबंधित विधेयक को संसद में दो बार पेश किया जाएगा। विधेयक का महत्व तभी होगा, जब यह संसद में पारित होगा..यह एक राजनीतिक फैसला है।”

अनुच्छेद 35ए के अनुसार, राज्य की विधायिका को जम्मू एवं कश्मीर के स्थायी नागरिकों के दर्जे को परिभाषित करने का अधिकार है।

साल 1954 में राष्ट्रपति के एक आदेश के जरिए इसे संविधान में शामिल किया गया था।  इसके अनुसार, कोई भी बाहरी व्यक्ति जम्मू एवं कश्मीर में संपत्ति नहीं खरीद सकता और राज्य में नौकरी नहीं कर सकता। यह अनुच्छेद राज्य की महिला नागरिकों को भी किसी बाहरी व्यक्ति से शादी करने की स्थिति में राज्य में किसी भी संपत्ति के अधिकार से वंचित करता है। इसे एक याचिका के जरिए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी गई है।

शीर्ष अदालत में अनुच्छेद 35ए को चुनौती देती छह याचिकाएं दायर की गई हैं।

कोई कानूनी और संवैधानिक गलती नहीं: सुभाष कश्‍यप

संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्‍यप ने आर्टिकल 370 को खत्‍म करने पर कहा, मैं केवल कह सकता हूं कि संवैधानिक रूप से ये मजबूत है, कोई कानूनी और संवैधानिक दोष इसमें पाया नहीं जा सकता है. सरकार ने सावधानीपूर्वक इस मामले की स्‍टडी की. जहां तक यदि इस निर्णय के राजनीतिक सवाल होने का है तो मुझे इस पर कुछ नहीं कहना है.

समझदारी वाला निर्णय नहीं: सोली सोराबजी

कश्मीर से अनुच्छेद 370 फैसला हटाने के फैसले पर मशहूर कानूनविद और पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ने कहा कि यह कोई क्रांतिकारी फैसला नहीं है. यह सिर्फ एक राजनीतिक फैसला है. लेकिन यह बढ़िया फैसला नहीं है. जब उनसे पूछा गया कि क्या जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का फैसला ऐतिहासिक है तो उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक फैसला भी ब्लंडर हो सकता है.

‘कश्मीर के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार खत्म नहीं होंगे’: सोराबजी ने कहा कि आर्टिकल 370 और 35 ए हटाने से जम्मू-कश्मीर के लोगों को लोकतांत्रिक अधिकार खत्म नहीं होंगे. भारत के दूसरे नागरिकों की तरह उन्हें भी लोकतांत्रिक अधिकार हासिल होंगे. सोली सोराबजी ने कहा कि आर्टिकल 35 संविधान का हिस्सा नहीं था. इसे राष्ट्रपति के आदेश से शामिल किया गया है. लेकिन भारत के जो कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं होते थे वे अब वहां लागू होंगे.

कश्मीर के लोगों के लिए गलत संदेश : राज्य को बांटने के लिए लाया गया जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल राज्यसभा की ओर से पारित किया जाएगा. इसमें लद्दाख को केंद्रित शासित प्रदेश बना दिया गया है. जम्मू-कश्मीर भी एक केंद्र शासित प्रदेश होगा.

सोराबजी ने पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को नजरबंद किए जाने को भी गलत करार दिया. उन्होंने कहा कि यह ठीक नहीं है. इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं थी और यह बिल्कुल घटिया कदम है. यह कश्मीर के लोगों को गलत संदेश देता है. मैं इसे मंजूर नहीं करता.सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी.

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Post source : agency

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