August 04, 2021

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देहरादून की पुरानी चाय कम्पनी की जमींन अवैध रूप से बेचीं गयी

देहरादून की पुरानी चाय कम्पनी की जमींन अवैध रूप से बेचीं गयी

  • अवैध रूप से रह रहे कम्पनी के रिटायर्ड क्लर्क ने कूटरचित दस्तावेज बना कर जमींन अवैध रूप से बेचीं।
  • सिविल जज (सी डी ) देहरादून के न्यायालय द्वारा न्यायालय का फैसला आने तक इस सम्पति को तीसरे व्यक्ति को विक्रय करने पर रोक लगा दी गयी है।
  • कंपनी के डायरेक्टर ने देहरादून पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के लिए लिखा शिकायती पत्र ।

डीटीसी इंडिया लिमिटेड द्वारा वर्ष 1979 में सुशील कुमार आर्य पुत्र स्व ओ पी शास्त्री हाल निवासी स्टाफ बाबूलाइन, आर्केडिया ग्रान्ट, देहरादून को अपनी कंपनी में नौकरी पर रखा था।

वर्ष 1983 -84 में ऑफिस के कार्यो में लापरवाही बरतने के कारण कंपनी द्वारा उन्हें निकल दिया गया। फिर उसके द्वारा कंपनी के सीनियर्स से माफ़ी मांगने और भविष्य में कोई लापरवाही नहीं बरतने का वादा करने पर उन्हें फिर से नौकरी पर वापस रख लिया गया और कंपनी के स्टाफ क्वार्टर मे मरमत करवा कर उनको रहने के लिए दे दिया गया। 2016 में सुशील कुमार आर्य कम्पनी से रिटायर्ड हो गए थे।

जिसके बाद डी टी सी इंडिया लिमिटेड कम्पनी द्वारा उन्हें स्टाफ क्वार्टर खली करने के सम्बन्ध में पत्र लिखा गया इस पर भी उन्होंने कंपनी के क्वार्टर को खली नहीं किया और वही रहने लग गए।

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डी के सिंह, पूर्णकालिक निदेशक, डी टी सी इंडिया लिमिटेड को हाल ही में पता चला कि सुशील कुमार आर्य ने 5 अप्रैल 2021 में कम्पनी की खसरा नं० 588 मी की 3560 वर्ग मीटर आबादी भूमि स्थित मौजा, आर्केडिया ग्रान्ट, जमीन जिसमे की कम्पनी का स्टाफ क्वार्टर भी बना है और वह स्वयं भी रहता है , को किसी और को बेच दिया है।

विक्रय पत्र पर सुशील कुमार आर्य की पत्नी त्रिशला आर्य भी गवाह बानी है। सुशील कुमार आर्य और उसकी पत्नी त्रिशला आर्य दोनों ने मिलकर एक आपराधिक षड्यंत्र रचा है इस षड्यंत्र के तहत इन्होने डी टी सी इंडिया लिमिटेड कंपनी की भूमि / सम्पति को स्वयं मालिक और काबिज दर्शा कर मात्र 70 ,00000/- सत्तर लाख रूपये में विक्रय कर दिया जबकि कंपनी की कथित भूमि की सरकारी कीमत 3,20 ,000000 तीन करोड़ बीस लाख रूपये है।

डी के सिंह, पूर्णकालिक निदेशक, डी टी सी इंडिया लिमिटेड ने आगे बताया इस सम्बन्द में उनके द्वारा प्रेमनगर थाने 15 अप्रैल 2021 को दिया शिकायती पत्र जिसमे उन्होंने पुलिस को लिखा सुशील कुमार आर्य और उसकी पत्नी त्रिशला आर्य ने कंपनी की सम्पति को अवैध रूप से कब्जाने के उद्देश्य से आपराधिक षड्यंत्र के तहत बेईमानी और कपटपूर्ण आशय से कूट रचित दस्तावेज तैयार किये गए और स्वयं को कंपनी की भूमि / सम्पति का मालिक दर्शाया गया जबकि इनको मालूम था की वे कथित भूमि के मालिक नहीं है। कंपनी द्वारा इस भूमि पर बहुत पहले से आम जनता के लिए एक बोर्ड भी लगा रखा है।

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जिसमे स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह सम्पति डी टी सी इंडिया लिमिटेड की है। इसके बाबजूद भी सुशील कुमार आर्य ने मिथ्या बैनामा कर कूटरचना कि और कम्पनी के साथ छल किया है व स्वयं को सदोष लाभ पहुंचाया है।

हमे आशंका है की बेचीं गयी जमीन की रकम मिलने के बाद दोनों पति पत्नी शहर छोड़ कर भाग सकते है। जिस कारण पुलिस द्वारा त्वरित कानूनी कार्यवाही की जानी आवश्यक है। अतः मेरा आग्रह है इन दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाय।

इस शिकायती पत्र की एक कॉपी 16 अप्रैल 2021 को मेरे द्वारा देहरादून पुलिस एस एस पी महोदय को भी दी गयी है। अभी तक पुलिस द्वारा मेरी शिकायत की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की गयी है।

मेरे द्वारा माननीय सिविल जज (सी डी ) देहरादून के न्यायालय में कंपनी की सम्पति की विक्रय पर रोक लगाने की अपील डाली गयी और 9 जुलाई 2021 को माननीय न्यायलय द्वारा न्यायालय का फैसला आने तक इस सम्पति को तीसरे व्यक्ति को विक्रय करने पर रोक लगा दी गयी है।

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डी के सिंह, पूर्णकालिक निदेशक, डी टी सी  इंडिया लिमिटेड 

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