शरद अरविन्द बोबडे ने ली देश के 47वें CJI के रूप में शपथ | Doonited.India

December 09, 2019

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शरद अरविन्द बोबडे ने ली देश के 47वें CJI के रूप में शपथ

शरद अरविन्द बोबडे ने ली देश के 47वें CJI के रूप में शपथ
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भारत के मुख्य न्यायाधीश शरद ए बोबडे को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने सोमवार सुबह राष्ट्रपति भवन में शपथ दिलाई. मुख्य न्यायाधीश बोबडे का कार्यकाल 18 महीनों से थोड़ा अधिक होगा. देश के मुख्य न्यायधीश बनने से पहले बोबडे सुप्रीम कोर्ट की उस बेंच का हिस्सा थे, जिन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद टाइटल सूट पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया.  मुख्य न्यायाधीश के रूप में सीजेआई बोबडे को सात न्यायाधीशों वाली पीठ का गठन करना होगा जो सबरीमाला पर महिलाओं के प्रवेश मामले में सुनवाई करेगा. चीफ जस्टिस बोबडे सबरीमाला की पांच न्यायाधीशों की पीठ का हिस्सा नहीं थे.

जस्टिस बोबड़े को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवा देने के बाद अप्रैल 2012 में सर्वोच्च न्यायालय में स्थान मिला था. जस्टिस बोबड़े महाराष्ट्र से हैं और उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय में कानून की पढाई की है. उनके दादा और पिता दोनों वकील थे. बोबडे ने 1978 में बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष कानून का अभ्यास शुरू किया.

1956 में जन्मे जस्टिस बोबडे को 1998 में एक वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया और मार्च 2000 में एक अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में उच्च न्यायालय भेजा गया. जस्टिस बोबडे ने शीर्ष अदालत में अहम भूमिका निभाई है. मई 2019 में उन्होंने CJI के कार्यालय के एक कर्मचारी सदस्य द्वारा CJI गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को सुनने वाली तीन-न्यायाधीश समिति का नेतृत्व किया.  भारत के 47वें मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे ने शपथ ली। उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जस्टिस बोबडे लगभग 18 महीने तक सीजेआइ के रूप में काम करेंगे और 23 अप्रैल, 2021 को सेवानिवृत्त होंगे।

शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहे पीएम

भारत के 46 वें मुख्य न्यायाधीश, जस्टिस गोगोई ने 3 अक्टूबर, 2018 को कार्यभार संभाला था और रविवार को इस पद से रिटायर हो गए। जस्टिस बोबडे के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

नागपुर से की थी स्नातक की पढाई

जस्टिस गोगोई ने ही 18 अक्टूबर को अपने उत्तराधिकारी के रूप में शीर्ष अदालत के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस बोबडे की सिफारिश की थी। 24 अप्रैल, 1956 को नागपुर में जन्मे जस्टिस बोबडे ने अपनी स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद नागपुर विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। उन्हें 1978 में बार काउंसिल ऑफ महाराष्ट्र के लिए नामांकित किया गया था और 1998 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया था।

2000 में बने थे बॉम्बे हाईकोर्ट में एडिशनल जज

जज के रूप में उनका करियर 29 मार्च 2000 को शुरू हुआ जब उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट में एडिशनल जज के रूप में नियुक्त किया गया। वह 16 अक्टूबर 2012 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस बने। उन्हें 12 अप्रैल, 2013 को सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में पदोन्नत किया गया था।

पांच जजों की बेंच के हिस्सा थे

जस्टिस बोबड़े अयोध्या भूमि विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के हिस्सा थे। जस्टिस बोबडे उस तीन जजों वाली पीठ का हिस्सा थे, जिसने 2015 में स्पष्ट किया कि आधार कार्ड के बिना भारत के किसी भी नागरिक को बुनियादी सेवाओं और सरकारी सेवाओं से वंचित नहीं किया जा सकता है।

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