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August 20, 2019

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उत्तराखण्ड में जूनियर ट्रैफिक फोर्स का शुभारम्भ

उत्तराखण्ड में जूनियर ट्रैफिक फोर्स का शुभारम्भ
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•  यातायात के नियमों को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी।
•  यातायात को सुगम बनाने के लिए सेफ, स्मूथ एवं स्माइलिंग वाली व्यवस्था जरूरी
• मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह में ट्रैफिक नियमों के पालन हेतु जनता से की अपील

मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को पुलिस लाईन देहरादून में 30वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जूनियर ट्रैफिक फोर्स उत्तराखण्ड का शुभारम्भ व यातायात निदेशालय द्वारा ट्रैफिक नियमों पर बनाये गये आॅडियो-वीडियो विजुवल का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि दुर्घटनाओं से बचने के लिए यातायात के नियमों का पालन जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। यातायात के नियमों का उल्लंघन कमजोर मानसिकता का परिचायक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यातायात निदेशालय द्वारा जूनियर ट्रैफिक फोर्स की पहल एक सराहनीय प्रयास है। उन्होंने इस फोर्स में शामिल होने वाले बच्चों को बधाई देते हुए कहा कि इन बच्चों ने पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी ली है। ये सामाजिक जीवन में नवचेतना का कार्य करेंगे।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड में बाहर से आने वाले पर्यटकों की संख्या अधिक है। यातायात के संसाधनों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। वर्तमान में लगभग 24 लाख वाहन पंजीकृत हैं। यातायात को नियंत्रित करने व दुर्घटनाओं से बचाव के लिए ट्रैफिक नियमों का पालन करना जरूरी है। यह हम सबका सामाजिक दायित्व भी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड पुलिस को आधुनिक बनाने के लिए सुरक्षा, सामाजिक सरोकार व स्वच्छता का मंत्र दिया गया है। उसी तरह यातायात को सुगम बनाने के लिए सेफ, स्मूथ एवं स्माइलिंग वाली व्यवस्था बनाने पर पुलिस जोर दे रही है। इसमें सभी के सहयोग की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वाहन दुर्घटनाओं से बचने के लिए हमें ट्रैफिक नियमों के पालन के साथ ही अन्य लोगों को भी इसके लिए जागरूक करना होगा।

पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार रतूड़ी ने कहा कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह का मुख्य उद्देश्य यातायात के नियमों का पालन व सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करना है। वाहनों के आवागमन में सुरक्षा महत्वपूर्ण है। यातायात नियमों के पालन हेतु जनजागरूकता के उद्देश्य से 50 स्कूलों के एक हजार बच्चों की एक जूनियर ट्रैफिक फोर्स बनाई गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस का कार्य अनुशासन बनाये रखना है। उन्होंने पुलिस से अपील की कि सबसे पहले स्वयं ट्रैफिक नियमों का पालन करें। जब अनुशासन की शुरूआत स्वयं से होती है, तो उसके बेहतर परिणाम होते हैं। उन्होंने कहा कि यातायात नियमों के पालन हेतु सभी सम्बन्धित विभागों को सामंजस्य के साथ कार्य करना जरूरी है।

पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने कहा कि किसी भी देश की ट्रैफिक व्यवस्था उस देश का आयना होती है। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोगों को जागरूक करने के लिए स्कूली छात्रों की जो जूनियर ट्रेफिक फोर्स बनाई गई है, यदि एक बच्चा एक दिन में 03 लोगों को भी जागरूक करता है तो सड़क दुर्घटनाओं में काफी कमी आयेगी।

यातायात निदेशक केवल खुराना ने कहा कि 04 से 10 फरवरी तक मनाये जा रहे राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह में यातायात के नियमों के पालन व सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से क्विज, पेंटिंग, स्लोगन प्रतियोगिताएं कराई जा रही हैं। पिछले वर्ष यातायात के नियमों के उल्लंघन में 12 लाख चालान हुए तो जो संख्या इस वर्ष बढ़कर 16 लाख पहुंच गई। इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं में 10 प्रतिशत कमी आई है। इस अवसर पर सम्भव मंच द्वारा सड़क सुरक्षा व यातायात नियमों के पालन पर एक लघु नाटिका का प्रस्तुतीकरण भी किया गया।

इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा, एंग्लो इंडियन विधायक जार्ज आईवन ग्रेगरी मैन, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विजया बड़थ्वाल व पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

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