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December 11, 2018

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सबसे वजनी उपग्रह GSAT-11 कक्षा में स्थापित

सबसे वजनी उपग्रह GSAT-11 कक्षा में स्थापित
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देश में इंटरनेट सेवाओं और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को नए मुकाम पर ले जाने के लिहाज़ से अहम सैटेलाइट GSAT-11 को सफलतापूर्वक अपनी कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। बुधवार तड़के भारत के अब तक के सबसे भारी सैटलाइट का फ्रेंच गुयाना से सफल प्रक्षेपण किया गया था। इस संचार उपग्रह को अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत का दूरगामी कदम माना जा रहा है.

शुरुआत में उपग्रह भू-समतुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में ले जाया जाएगा और उसके बाद उसे भू-स्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा। करीब 5,854 किलोग्राम वजन का जीसैट-11 सबसे वजनी उपग्रह है  जिसमें सबसे बडे सौर पैनल और पेलोड पैनल हैं। हर सोलर पैनल की लंबाई 4 मीटर से अधिक है  ।इस उपग्रह में इनसैट जीसैट समूह के अब तक के सबसे ज्यादा पांच एंटीना कनफीगर किए गए हैं ।

जीसैट-11 अगली पीढ़ी का ”हाई थ्रुपुट” संचार उपग्रह है और इसका जीवनकाल 15 साल से अधिक का है। इसे पहले 25 मई को प्रक्षेपित किया जाना था लेकिन इसरो ने अतिरिक्त तकनीकी जांच का हवाला देते हुए इसके प्रक्षेपण का कार्यक्रम बदल दिया।

GSAT-11 को खास तौर पर ग्रामीण भारत में इंटरनेट क्रांति के लिहाज से बहुत अहम माना जा रहा है । जीसैट-11 देशभर में ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा। यह उपग्रह भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत ग्रामीण और दूरदराज की ग्राम पंचायतों को भारत नेट प्रोजेक्ट के तहत ब्राडबैंड कनेक्टिवटी की जरुरतों को पूरा करेगा ।

इस सैटलाइट की खास बात है कि यह बीम्स को कई बार प्रयोग करने में सक्षम है, जिससे पूरे देश के भौगोलिक क्षेत्र को कवर किया जा सकेगा। इससे पहले के जो सैटलाइट लॉन्च किए गए थे उसमें ब्रॉड सिंगल बीम का प्रयोग किया गया था जो इतने शक्तिशाली नहीं होते थे कि बहुत बड़े क्षेत्र को कवर कर सकें।

मल्टीस्पॉट बीम वाले उपग्रह से भारतीय मुख्य भू भाग तथा द्वीपों में संचार सुविधाएं उपलबध होंगी । इसरो के मुताबिक इस सैटेलाइट के कारण देशवासियों को इंटरनेट स्पीड में बड़ा बदलाव दिखेगा। कहा जा रहा है कि इसकी सहायता से हाई बैंडविथ कनेक्टिविटी 14 गीगाबाइट प्रति सेकेंड डेटा ट्रांसफर स्पीड संभव है।

एरियाने-5 रॉकेट जीसैट-11 के साथ कोरिया एयरोस्पेस अनुसंधान संस्थान केएआरआई  के लिए जियो-कोम्पसैट-2ए उपग्रह भी लेकर जाएगा। यह उपग्रह मौसम विज्ञान से संबंधित है। कुल मिलाकर  इस सैटलाइट को भारतीय अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक बहुत दूरगामी कदम माना जा रहा है।  इंटरनेट स्पीड खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट क्रांति के लिहाज से GSAT-11 सैटेलाइट   मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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Post source : agency

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