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भारत की चीन साइबर आर्मी पर डिजिटल स्ट्राइक

भारत की चीन साइबर आर्मी पर डिजिटल स्ट्राइक
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भारत सरकार ने चीन के कुटिल मंसूबों को एक ही झटके में धराशाई कर दिया है। भारत की इस कार्रवाई को चीन पर डिजिटल स्ट्राइक का नाम दिया जा रहा है। इस स्ट्राइक में भारत को न गोली चलानी पड़ी है और कोई मिसाइल ही दागनी पड़ी। भारत ने चीन को उसी के हथियार से निशाना बना डाला है। ऐसा समझा जा रहा था कि चीन इन मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए न केवल डेटा हैक कर रहा था बल्कि भारत में भीतर तक चुपचाप सेंध लगा रहा था। ऐसा भी बताया जाता है कि चीन की साइबर आर्मी ने भारत पर चालीस हजार से ज्यादा बार हमले की कोशिश की थी। भारत को आशंका थी कि शी जिनपिंग की साइबर आर्मी इन्ही एप्स के माध्यम से भारत पर बड़ा साइबर हमले की साजिश कर रही है। इन्ही सब आशंकाओं के मद्देनजर सभी मोबाइल एप्स को बैन कर दिया गया।

भारत सरकार ने आज जो कार्रवाई की है उसमें मशहूर टिक-टॉक ऐप भी शामिल है। इसके अलावा यूसी ब्राउजर, कैम स्कैनर जैसे और भी बहुत फेमस ऐप शामिल हैं। इससे पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों से चाइनीज एप की एक लिस्ट तैयार कर केंद्र सरकार से अपील की थी इनको बैन किया जाए या फिर लोगों को कहा जाए कि इनको तुरंत अपने मोबाइल से हटा दें। इसके पीछे दलील ये दी गई थी कि चीन भारतीय डेटा हैक कर सकता है। ध्यान रहे, भारत सरकार का यह फैसला इसलिए बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्यों कि मंगलवार को चीन के आग्रह पर भारतीय क्षेत्र चुशूल में भारत और चीन के कोर कमाण्डरों की तीसरे दौर की बैठक होने जा रही है।

इस समय दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे की आंखों में आंखें डाले खड़ी हुई हैं। दोनों ओर से भयंकर मोर्चाबंदी हो रही है। लगभग चार हजार किलोमीटर लंबी सीमा के अलावा चीन पाकिस्तान के साथ मिल कर भारत पर हमले का षडयंत्र रच रहा है। चीन के सैनिक पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाके में पाकिस्तानी फौजी अफसरों के साथ देखे गये हैं। चीन आर्मी के अफसरों ने पाकिस्तान के बंद पड़े सैनिक हवाई अड्डों का निरीक्षण भी किया है।

 

  •  चीन को धीरे-धीरे भारत से टकराव करना भारी पड़ता जा रहा है। बॉर्डर पर तनाव के कारण चीन को भारत में बहिष्कार का सामना करना पड़ रहा है। भारत से शुरू हुआ ये बहिष्कार अब दुनिया भर में फैलता जा रहा है। पूरी दुनिया इस समय चीन का सामान खरीदने से कतरा रही है।

दुनियाभर में चीन में बने सामान की मांग लगातार घट रही है. जिसके कारण चीन का कोराबार बुरी तरह से नीचे गिरता जा रहा है। जून में चीन में मैन्‍युफैक्‍चरिंग गतिविधियों की रफ्तार काफी धीमी रही है।

  • चीन का खरीद प्रबंध सूचकांक (PMI) जून में गिरकर 50.4 रहने के आसार हैं, जो मई में 50.6 पर था. जिसका सीधा मतलब ये है कि चीन में फैक्ट्री गतिविधियां घट रही है।

चीन के सामानों के बहिष्कार का एक कारण ये भी है कि लगभग सभी देशों को लगता है कि कोरोना वायरस चीन से आया है। चीन ने समय से चेतावनी नहीं दी जिसके कारण आज ये दुनियाभर में फैल चूका है। इतना ही नहीं चीन देशों की मदद करने की जगह उन्हें गलत मास्क और पीपीई किट भी भेज रहा है।

  • चीन के निर्यात में मई में 3.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन महामारी से संबंधित चिकित्सा आपूर्ति की मांग के कारण स्थिति कुछ संभल गई।

बता दें कि भारत में चीनी सामान, एप और अन्य टेक्नोलॉजी के बहिष्कार की मुहिम शुरू होने से चीन भी सहमा हुआ है। कोरोना संक्रमण के चलते चीन की अर्थव्यवस्था भी बुरे दौर में है और वह भारत जैसे दुनिया के एक बड़े बाज़ार को खोना नहीं चाहता है।

  • ऐसे में भारत से बातचीत जारी रखने के साथ-साथ वह अपनी सरकारी मीडिया के जरिए लगातार प्रोपगैंडा फैला रहा है कि चीनी सामान का बहिष्कार करने से भारत की अर्थव्यवस्था को ही झटका लगने वाला है। हाल ही में चीन की तरफ से ये भी कहा गया है कि टिड्डियों के अटैक के बाद भारत में खाद्यान संकट पैदा हो सकता है इसलिए उसे चीन के साथ ट्रेड वार में उलझकर वक़्त नहीं बर्बाद करना चाहिए।

 




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Post source : Agency

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