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भारत ने दौलत बेग ओल्डी में तैनात किए टी-90 टैंक्स

भारत ने दौलत बेग ओल्डी में तैनात किए टी-90 टैंक्स
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गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद भले ही चीनी सेना भारतीय हिस्सों से पीछे हटने को राजी हुई है, लेकिन एलएसी पर भारत अब भी किसी लापरवाही के मूड में नहीं है। वास्तविक नियंत्रण रेखा के उस पार चीनी सेना ने अक्साई चिन के कब्जाए इलाके में 50 हजार सैनिक लगा दिए हैं।

अक्साई चिन की इस स्थिति को भांपते हुए भारत ने भी सामरिक रूप से महत्वपूर्ण दौलत बेग ओल्डी के इलाके में टी-90 टैंक्स और 4 हजार सैनिकों को तैनात कर दिया है। इन जवानों की तैनाती के साथ ही भारत एलएसी की सख्त निगरानी कर रहा है। दौलत बेग ओल्डी के जिस इलाके में भारतीय सेना ने 4 हजार जवानों की तैनाती की है, उसे सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण कहा जाता है। इस इलाके में स्थित दुनिया की सबसे ऊंची एयरस्ट्रिप पर भी भारत का आधिपत्य है। दौलत बेग ओल्डी का ये इलाका काराकोरम पास के निकट है।

होवित्जर टैंक्स और इंफेंट्री वीकल्स की तैनाती

इस इलाके में भारत ने पहले ही इंफ्रैट्री कॉन्बैट वीकल्स, 155 एमएम होवित्जर तोपों और बड़ी संख्या में जवानों की तैनाती कर रखी है। इसके अलावा भारतीय सेना के जवान अक्साई चिन में हो रही चीनी सेना की हरकतों पर पूरी नजर रख रहे हैं। चीन की ओर से अक्साई चिन के कुछ हिस्सों में टैंक्स, एयर डिफेंस रेडार और मिसाइल सिस्टम को तैनात करने के इनपुट्स मिले हैं। इसे देखते हुए भारत भी अपनी आउट पोस्ट्स पर पूरी तरह से सतर्कता बरत रहा है।

साजिशों पर सख्त जवाब की तैयारी

उच्च स्तरीय सूत्रों का कहना है कि भारत और चीन के सैनिक अब तक डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाए हैं। इसे चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है, जिससे कि एलएसी पर तनाव की स्थितियां कम की जा सकें। हालांकि अक्साई चिन में चीनी सैनिकों की तैनाती को देखते हुए भारत किसी भी कोताही के मूड में नहीं है। सूत्रों का कहना है कि टी-90 टैंक्स की तैनाती और जवानों की मूवमेंट सिर्फ इसलिए कराई गई है, जिससे कि एलएसी पर चीन की ओर से होने वाली किसी भी नापाक हरकत का प्रभावी रूप से मुकाबला किया जा सके।




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Post source : Agency

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