देहरादून: इक्फाई विवि में गवर्नेंस की चुनौतियां एक अंदरूनी सूत्र का दृष्टिकोण पर हुई पैनल चर्चा | Doonited.India

October 16, 2019

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देहरादून: इक्फाई विवि में गवर्नेंस की चुनौतियां एक अंदरूनी सूत्र का दृष्टिकोण पर हुई पैनल चर्चा

देहरादून: इक्फाई विवि में गवर्नेंस की चुनौतियां एक अंदरूनी सूत्र का दृष्टिकोण पर हुई पैनल चर्चा
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देहरादून: बीके चतुर्वेदी पूर्व-कैबिनेट सचिव द्वारा लिखित पुस्तक चैलेंज ऑफ गवर्नेंस एन इन्साइडर्स व्यू पर एक पैनल चर्चा देहरादून के इक्फाई विश्वविद्यालय में आयोजित की गई। इस कार्यक्रम का समन्वयन इक्फाई बिजनेस स्कूल के डॉ. अमित जोशी और सहायक प्रोफेसर प्रीति भास्कर ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व कैबिनेट सचिव बीके चतुर्वेदी थे।

इस आयोजन की अध्यक्षता उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव और इक्फाई विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. एम. रामचंद्रन ने की। इस अवसर पर पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान सूचना आयुक्त (उत्तराखंड सरकार) शत्रुघ्न सिंह, उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव और डी आई टी यूनिसन यूनिवर्सिटी के चांसलर रवि शंकर, उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पाण्डेय पैनल चर्चा के प्रमुख वक्ता थे।

मुख्य अतिथि बी के चतुर्वेदी ने अपनी पुस्तक चैलेंज ऑफ गवर्नेंस एन इन्साइडर्स व्यू का संदर्भ देकर इस विषय पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा यह महत्वपूर्ण है कि सिविल सेवक अपने काम के बारे में उसी तरीके से लिखें, जिस तरीके से उन्होंने चुनौतियों का सामना किया था।यह लिखित सामग्री है जिस से ज्ञान विकसित होता है। वर्षों से, मैंने राजनीतिक अधिकारियों में अपनी पसंद के आई ए एस अधिकारियों का चयन करने की तीव्र इच्छा देखी है। इसलिए कि चयनित अधिकारी उनके लाभों को ध्यान में रखेगा। कार्यक्रमों के बजाय कर्मियों पर यह ध्यान शासन में सुधार नहीं करता है। राज्य कैडर के आईएएस अधिकारियों द्वारा नैतिक संहिता के उल्लंघन की मुख्य सचिव द्वारा निगरानी की जानी चाहिए। हालांकि यह तभी संभव होगा जब वह भारत सरकार के कैबिनेट सचिव की तरह कम से कम चार साल का कार्यकाल पूरा कर सके।

पारदर्शिता, ईमानदारी और कड़ी मेहनत सुशासन के आधार स्तंभ हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. बी के जोशी ने श्री चतुर्वेदी की पुस्तक को एक अंदरूनी सूत्र के दृष्टिकोण से पेश किया। उन्होंने कहा कि पुस्तक सरकार में निर्णय लेने की प्रक्रिया की चुनौतियों का विश्लेषण करती है, सिविल सेवा के सामने आने वाली खींचतान और दबाव और जटिल मुद्दों को हल करने के बारे में शिक्षित करती है।

यह पुस्तक 2004 की सूनामी जैसी महत्वपूर्ण घटनाएं और भारत-अमेरिका परमाणु समझौते में सहयोगी दलों की महत्वपूर्ण भूमिका, 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाला पर सीएजी रिपोर्ट द्वारा सरकार की भ्रष्टाचार की धारणा को गहराई से समझने के साथ पूरी तरह से संतुलित है। पूर्व मुख्य सचिव और वर्तमान सूचना आयुक्त शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि भारत की शिक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार के लिए अच्छे शासन की आवश्यकता है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव और इक्फाई विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. एम. रामचंद्रन ने कहा श्री चतुर्वेदी की पुस्तक व्यक्तिगत प्रतिबिंब और राजनीतिक इतिहास का मिश्रण है और यह उनके व्यापक अनुभव और श्रमसाध्य डेटा संग्रह को दर्शाता है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव और डी आई टी यूनिसन यूनिवर्सिटी के चांसलर श्री रवि शंकर ने कहा, ष्हमें सुशासन पर जोर देने की आवश्यकता है और भविष्य में प्रौद्योगिकी पर बहुत अधिक निर्भरता के नकारात्मक प्रभाव होंगे। उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पाण्डेय, ने कहा हमें आई ए एस प्रणाली को मजबूत करने और एक व्यवस्थित सुधार की शुरुआत करने की आवश्यकता है। हमें आम जनता के बीच नौकरशाहों की एक बेहतर छवि बनाने के लिए प्रणाली के पुनर्गठन पर विचार करना चाहिए।

विश्वविद्यालय के छात्रों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया और पैनलिस्टों से आरटीआई और धार्मिक सद्भाव के बारे में पूछा। इक्फाई विश्वविद्यालय, देहरादून के कुलपति डॉ. पवन कुमार अग्रवाल, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. मुड्डू विनय, ब्रिगेडियर राजीव सेठी (सेवानिवृत्त), इक्फाई विश्वविद्यालय, देहरादून के सभी छात्रों और संकाय सदस्यों के साथ चर्चा के दौरान उपस्थित थे।

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