साहित्य व समाज का अंतः संबंध विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीयसंगोष्ठी का आज शुभारंभ हुआ | Doonited.India

September 20, 2019

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साहित्य व समाज का अंतः संबंध विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीयसंगोष्ठी का आज शुभारंभ हुआ

साहित्य व समाज का अंतः संबंध विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीयसंगोष्ठी का आज शुभारंभ हुआ
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केंद्रीय हिंदी निदेशालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, नई दिल्ली एवं हिंदी विभाग देव संस्कृति विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य व समाज का अंतः संबंध विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीयसंगोष्ठी का आज शुभारंभ हुआ। संगोष्ठी में आठ प्रांत एवं उत्तराखण्ड के 11 जिलों से प्रतिभागी समिल्लित हुए। संगोष्ठी का शुभारंभ देसंविविके कुलपति शरद पारधी व केंद्रीय हिंदी निदेशालय कीसहायक निर्देशिका अंजू सिंह ने सयुंक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए देसंविवि के कुलपति शरद पारधी ने कहा कि साहित्य का धर्म हर नए विचार को समाज में पहुँचाना है। इसी उद्देश्य के लिए पं श्रीराम शर्मा आचार्य ने तीन हजार दो सौ सेअधिक साहित्यों का सृजन किया है।  संत, सुधाकर व शहीदों द्वारा लिखी गयी रचनाएं आज भी समाज में इतना प्रभाव डालती है कि मनुष्य के व्यक्तित्व को ऊंचा उठा सके। वहीं केंद्रीय हिंदीनिदेशालय की सहायक निर्देशिका अंजू सिंह ने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए हिंदी निदेशालय की स्थापना हुई तथा हिंदी निदेशालय के तमाम कार्यक्रमों व गतिविधियों को सभी के समक्ष रखा।

देसंविवि के स्कूल ऑफ इंडोलॉजी के प्रोफेसर सुरेश वर्णवाल ने साहित्य व समाज के संबंध पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज साहित्यों द्वारा समाज में सकारात्मक सुधारों के लिए बेहतरप्रयास हो रहे है। समाज में साहित्यों का योगदान किसी से छुपा नहीं है। साथ ही देसंविवि के स्कूल ऑफ इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी के डीन प्रोफेसर अभय सक्सेना ने साहित्य का सृजन व समाज के निर्माणकी बात बताते हुए कहा कि आज प्रत्येक व्यक्ति को अपने संस्कृति को महत्व देने की आवश्यकता है और इसी माध्यम से यह संगोष्ठी व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने के लिए लाभप्रद साबित होगी।

वहीं अगले सत्र में विभिन्न विषयों पर वर्धा महाराष्ट्र के डॉ. अवधेश शुक्ल, दिल्ली के डॉ. रमेश तिवारी, डॉ. पवन विजय, डॉ. सुधाकर पाठक, काशीपुर के डॉ. सुभाष चंद्र कुशवाहा, बनारस के डॉ. देवेंद्र सिंह, देसंविवि के प्रो. सुखनंदन सिंह, रुड़की के डॉ. सुशील उपाध्याय एवंदेवप्रयाग के डॉ. वीरेंद्र सिंह बर्त्वाल जैसे विशेषज्ञों ने संगोष्ठी में अपने महत्वपूर्ण विचार रखें। इस दौरान शोधार्थियों द्वारा कई शोध पत्र प्रस्तुत किये गये। इस अवसर पर देसंविवि की उपकुलसचिव डॉ. स्मिता वशिष्ठ, शिक्षाशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ममता अरोड़ा, योग विभाग के समन्वयक डॉ. अमृतलाल गुरवेंद्र, विभिन्न प्रान्तों से आये विषय विशेषज्ञ, शोधार्थी, देसंविवि के विद्यार्थी एवं आचार्यगणउपस्थित रहे।

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