December 07, 2021

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हरिवंशराय बच्चन: भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को बढ़ावा दिया

हरिवंशराय बच्चन: भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को बढ़ावा दिया

च्यवद (रोमांटिक) पीढ़ी के इस मशाल वाहक का जन्म 27 नवंबर, 1907 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। उन्हें ‘मधुशाला’ के लिए जाना जाता है – जो छंदों की एक पुस्तक है। उन्होंने भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को बढ़ावा देने में बहुत मेहनत की। विदेश मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कुछ प्रमुख कार्यों का हिंदी में अनुवाद किया, जिसमें ओथेलो, मैकबेथ, भगवद गीता, रुबैयत और डब्ल्यू.बी येट्स के कार्य शामिल हैं। उनकी अन्य प्रशंसित कृतियों के अलावा, चार-भाग की धारावाहिक जीवनी, ‘क्या भूलूँ क्या याद कारू’, ’नीड़ का निरामन फिर ’, ‘बसेरे से दूर’ और अंतिम ‘दशद्वार से सोपान तक’ भी एक उल्लेख की आवश्यकता है। 18 जनवरी, 2003 को उनका निधन हो गया।

बच्चन हिन्दी कविता के उत्तर छायावत काल के प्रमुख कवियों में से एक हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मधुशाला है। भारतीय फिल्म उद्योग के प्रख्यात अभिनेता अमिताभ बच्चन उनके सुपुत्र हैं। उनकी मृत्यु 18 जनवरी 2003 में सांस की बीमारी के वजह से मुंबई में हुई थी। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अंग्रेजी का अध्यापन किया। बाद में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिन्दी विशेषज्ञ रहे। अनन्तर राज्य सभा के मनोनीत सदस्य रहे। बच्चन जी की गिनती हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में होती है।

इनके पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव तथा माता का नाम सरस्वती देवी था। इनको बाल्यकाल में ‘बच्चन’ कहा जाता था जिसका शाब्दिक अर्थ ‘बच्चा’ या ‘संतान’ होता है। बाद में ये इसी नाम से मशहूर हुए। उन्होंने कायस्थ पाठशाला में पहले उर्दू और फिर हिंदी की शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम॰ए॰ और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य के विख्यात कवि डब्लू॰बी॰ यीट्स की कविताओं पर शोध कर PH.D(पीएच.डी.) पूरी की थी। उनकी मृत्यु 18 जनवरी 2003 में सांस की बीमारी के वजह से मुंबई में हो गयी।

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