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गौतम से बुध तक …..

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जब भी बिहार में टूरिज्म की बात आती है तब बोध गया का ख्याल सबसे पहले मन में आता है। यूं तो बोध गया में अनेकों मंदिर हैं जिनके दर्शन के लिए दूर दूर से श्रद्धालु आते हैं। अपने देश के साथ साथ विश्वभर से लोग यहां घूमने आतें हैं। मगर आज हम खासकर बात करेंगे बोध गया की सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण को जो है ‘बोधि वृक्ष’!

वृक्ष की देखभाल के लिए देहरादून के फॉरेस्ट रीसर्च इंस्टीट्यूट (FRI- DEHRADUN) की मदद ली जा रही है। 2015 में मंदिर समिति ने इंस्टीट्यूट से दस साल का एग्रीमेंट भी किया था। दस साल की देखभाल के बदले उन्हें 50 लाख की रकम दी जाएगी।

बोधि वृक्ष एक विशालकाय वृक्ष है जिसकी टहनियां इतनी ज्यादा बड़ी है कि उन्हें 12 लोहे की पिलरों से सहारा दिया गया है। इस वृक्ष को बिहार में भगवान से कम दर्जा नहीं दिया जाता है। यह वही वृक्ष है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। अन्य श्रद्धालुओं के साथ साथ पूरे विश्वभर में बौद्ध धर्म को मानने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह बोधि वृक्ष उनके भगवान की परछाई है। हर साल 5 लाख से ज्यादा श्रद्धालु यहां बोधि वृक्ष के दर्शन के लिए आते हैं। जिसमें से 1.5 लाख विदेशी होते हैं।

बोधि वृक्ष के पीछे की कहानी यही है कि गौतम बुद्ध यहां ध्यान में लीन बैठे थे, तभी उनके ऊपर पेड़ का एक पत्ता गिरा था। और इसी से उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ था। तब से लेकर अब तक लोग वृक्ष के पत्तों को लोग बहुत पवित्र मानते है और घर में उनकी पूजा करते हैं। यहां गिरे हुए पत्तों को मंदिर समिति जमा करके रखती हैं।

हर तीन चार साल पर यहां साइंटिस्ट आकार वृक्ष का निरीक्षण करते हैं। वृक्ष के स्वास्थ्य के अनुसार दवा का छिड़काव , सुखी टहनियों की कटाई और केमिकल लेप लगाया जाता है। इस बात का भी ख्याल रखा जाता है कि वृक्ष में कोई बीमारी ना लगे।

बोधि वृक्ष बिहार की धरोहर है। जो कि कई श्रद्धालुओं के आस्था का पवित्र स्थल है।

आज बुद्ध पूर्णिमा के पावन पर्व पर आप सभी मित्रों को सपरिवार हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ ।

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