यमुना नदी को स्वच्छ बनाने को अवसरों एवं बाधाओं की पहचान पर हुआ विचार-विमर्श  | Doonited.India

November 21, 2019

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यमुना नदी को स्वच्छ बनाने को अवसरों एवं बाधाओं की पहचान पर हुआ विचार-विमर्श 

यमुना नदी को स्वच्छ बनाने को अवसरों एवं बाधाओं की पहचान पर हुआ विचार-विमर्श 
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देहरादून: वन अनुसंधान संस्थान द्वारा संस्थान के दीक्षांत कक्ष में उत्तराखंड राज्य के लिए वानिकी मध्यस्थता के जरिए यमुना नदी के पुनरुद्धार हेतु डीपीआर तैयार करने के लिए उत्तराखंड राज्य के साथ पहली एक दिवसीय परामर्श बैठक का आयोजन किया गया है। यह बैठक भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा स्वीकृत परियोजना के तहत आयोजित की गई है।

 

इस बैठक में आईआईटी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी, भारतीय सुदूर संवेदी संस्थान, मृदा संरक्षण, उत्तराखंड राज्य वन विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि सहित विशेषज्ञों और हितधारकों ने भाग लिया तथा परियोजना के सूवीकर.ा एवं कार्यान्वयन तथा यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लिए अवसरो एवं बाधाओं की पहचान हेतु विचार-विमर्श किए।

बैठक के प्रारंभ में डॉ. दिनेश कुमार, वैज्ञानिक जी एवं परियोजना समन्वयक ने गणमान्य व्यक्तियों एवं हितधारकों का स्वागत किया तथा परियोजना के बारे में संक्षिप्त जानकारी प्रदान की। तत्पश्चात ए.एस. रावत निदेशक, व.अ.स. ने प्रतिनिधियों को यमुना को स्वच्छ बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों के बारे में बताया। उन्हांेने यमुना नदी के चारों ओर विविध कार्यकलापों के बारे में भी जिक्र किया। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् वानिकी मध्यस्थता के जरिए 13 बड़ी नदियों के पुनरूद्धार का कार्य कर रही है। उन्हांेने यह भी बताया कि वानिकी मध्यस्थता के जरि, यमुना के पुनरूद्धार के डी0पी0आर0 का कार्य मार्च 2020 तक तैयार कर लिया जाएगा।

एस. डी. शर्मा उप महानिदेशक (अनुसंधान), आईसीएफआरई ने भी विभिन्न नई तकनीकों द्वारा सभी प्रमुख नदियों को कैसे साफ किया जाए। उत्तराखंड वन निगम के एमडी मनीष मुलिक, भा.व.से. ने यमुना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में वानिकी मध्यस्थता का विवरण दिया तथा उन्होंने परियोजना की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं भी दीं। विभिन्न विशेषज्ञों ने यमुना सफाई पर तीन तकनीकी सत्रों में जैसे गंगा सफाई के प्रयासों से प्राप्त किए गए अनुभव और भविष्य की संभावनाएँ, वानिकी हस्तक्षेप, सामुदायिक भागीदारी मॉडल, स्टेकहोल्डर कॉन्सल्टेशन, प्रौद्योगिकी उपयोग और जीआईएस लेयरों की मापदंड की पहचान और पैनल चर्चा पर अपने विचार व्यक्त किए।

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