August 01, 2021

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भारत के पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा का निधन

भारत के पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा का निधन

भारत के पूर्व क्रिकेटर यशपाल शर्मा (Yashpal Sharma) का निधन हो गया है. . यशपाल शर्मा 1983 में वनडे का पहला वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे.

उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई

उन्होंने अपने करियर में भारत के लिए 37 टेस्ट और 42 वनडे खेले हैं. टेस्ट क्रिकेट में 2 शतक के साथ उन्होंने 1606 रन बनाए हैं. जबकि वनडे क्रिकेट में 89 रन दर्ज है. यशपाल शर्मा को 13 जुलाई के तड़के दिल का दौरा पड़े, जिसके बाद उनका निधन हुआ.

इंटरनेशनल क्रिकेट में यशपाल शर्मा का डेब्यू पाकिस्तान के खिलाफ सियालकोट में खेले वनडे मुकाबले से साल 1978 में हुआ था. इसके बाद अगले ही साल उन्होंने अपना पहला टेस्ट मैच भी इंग्लैंड के खिलाफ क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर खेला. शर्मा ने अपना आखिरी वनडे साल 1985 में इंग्लैंड के खिलाफ चंडीगढ़ में जबकि आखिरी टेस्ट मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ दिल्ली में साल 1983 में खेला था.

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कभी जीरो पर आउट नहीं हुए

यशपाल शर्मा (Yashpal Sharma) 1983 में भारतीय टीम को विश्व कप जिताने वाली टीम के सदस्य और पूर्व खिलाड़ी यशपाल शर्मा का नाम भी इस अनोखी लिस्ट में शामिल है। वह इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर काबिज हैं। यशपाल शर्मा भारत के लिये 1978 में डेब्यू किया और साल 1985 तक वह भारतीय वनडे टीम के लिये खेलते रहे। इस दौरान उन्होंने 42 मैच की 40 पारियों में 883 रन बनाए, जिसमें उनका सर्वाधिक स्कोर 89 रन रहा। यशपाल ने अपने करियर में कुल 4 अर्धशतक लगाए और कभी जीरो पर आउट नहीं हुए।

1983 वर्ल्ड कप जीत के हीरो

यशपाल शर्मा 1983 में भारत के लिए वनडे का पहला विश्व कप जीतने वाली टीम के हीरो रहे थे. ओपनिंग मैच में 89 रन की पारी खेलकर उन्होंने वर्ल्ड कप की पिच पर वेस्ट इंडीज की पहली हार की स्क्रिप्ट लिखी थी. वहीं सेमीफाइनल में 61 रन बनाकर वो टीम के टॉप स्कोरर रहे थे. बॉब विलिस की यॉर्कर जैसी गेंद पर लेग साइड में जमाया उनका छक्का आज भी क्रिकेट इतिहास के यादगार शॉट्स में शुमार है.

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भारत के मीडिल ऑर्डर की रीढ़ रहे यशपाल शर्मा का लगभग पूरा जीवन क्रिकेट को समर्पित रहा. क्रिकेट से रिटायर होकर भी वो इस खेल से जुड़े रहे. वो टीम इंडिया के नेशनल सेलेक्टर भी बने. उनका पहला फेज सेलेक्टर की भूमिका में 2003 से दिसंबर 2005 तक का रहा. इसके बाद 2008 में इस रोल में उनकी दोबारा से वापसी हुई. बतौर सेलेक्टर उन्होंने भारतीय क्रिकेट से जुड़े कई अहम फैसलों में अपना योगदान दिया, जिसमें सौरव गांगुली बनाम ग्रेग चैपल विवाद भी शामिल है. टीम इंडिया के सेलेक्टर बनने से पहले उन्होंने कुछ वक्त तक अंपायरिंग भी की.

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