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कोविड-19: माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के लिए पांच दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण का शिक्षामंत्री ने किया शुभारंभ

कोविड-19: माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के लिए पांच दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण का शिक्षामंत्री ने किया शुभारंभ
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 माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत प्रधानाचार्यों के लिए पांच दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण का शुभारंभ राज्य के शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के द्वारा किया गया। कोविड-19 के संक्रमण के फलस्वरूप ऑनलाइन शिक्षण की प्रक्रिया पर आधारित है।

प्रशिक्षण का उद्देश्य माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्यों को ऑनलाइन शिक्षण प्रशिक्षण प्रविधि पर दक्ष करना है।  माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्यों के लिए पांच दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण का शुभारंभ राज्य के माननीय शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के द्वारा किया गया है। यह प्रशिक्षण राज्य शैक्षणिक प्रबंधन संस्थान (सीमैट), उत्तराखण्ड, देहरादून द्वारा आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्यों को ऑनलाइन शिक्षण प्रशिक्षण प्रविधि पर दक्ष करना है।

प्रशिक्षण को केंद्रीग स्टूडियो राजीव गांधी नवोदय विद्यालय देहारदून से प्रसारित किया जा रहा है तथा माध्यमिक विद्यालय जहां पर वर्चुअल आई.सी.टी लैब, जिनकी संख्या 500 है, के प्रधानाचार्यों के लिए आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश के शिक्षा मंत्री के द्वारा 500 प्रधानाचार्यों, राज्य के सभी जनपदों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों, विद्यालयों के विद्यालय के प्रबंध समितियों के सदस्य तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ वार्तालाप किया गया।

प्रशिक्षण के शुभारंभ के दिन 48 विद्यालय के केंद्रीय स्टूडियो में प्रधानाचार्यों से शिक्षा मंत्री ने कोविड-19 के संक्रमण के फलस्वरूप शिक्षा तथा परीक्षा के बाधित होने के कारण हुई परेशानियों पर सीधी वार्ता की। अधिकांश प्रधानाचार्यों द्वारा शेष परिषदीय परीक्षाओं को संपन्न करवाने करवाने तथा मूल्यांकन कार्य प्रारंभ करने पर अपनी पृष्छा की, जिनके बारे में माननीय शिक्षा मंत्री जी ने प्रशिक् ओं का समाधान किया। माननीय मंत्री जी ने युवाओं का आह्वान किया कि वे कोरोना से लड़ने के लिए वॉलिंटियर के  रूप में काम करेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि अधिक्तर राज्य में 1,50,000 वॉलिंटियर तैयार हो गये हैं और राज्य सरकार का लक्ष्य ढाई लाख वॉलिंटियर तैयार करना है। माननीय मंत्री जी ने समस्त जनता का आह्वान किया कि वे कोरोना से लड़ने के लिए स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का अनुपालन करें तथा बाहर से आये हुए प्रवासियों के साथ आत्मीयतापूर्ण व्यवहार करें।

यह अनोखी पहल उत्तराखण्ड के  दूरद्रष्टा व माननीय शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे की बदौलत संभव हुई, जिन्होंने इस वर्चुअल क्लासरूम टेक्नोलॉजी को उत्तराखण्ड के सबसे दूरदराज के इलाके में लागू करने में सफलता पाई। यह प्रशिक्षण सीमैट द्वारा दिनांक 26 से 30 मई, 2020 तक संचालित किया जा रहा है, जिसमें कोविड-19 के संक्रमण के फलस्वरूप ऑनलाइन शिक्षण की प्रक्रिया पर आधारित है। प्रशिक्षण में प्रतिदिन प्रातरू 10.30 बजे से 12.00 बजे तक प्रथम सत्र एवं 12.30 बजे से 2.00 बजे तक द्वितीय सत्र आयोजित किये जाने हैं। प्रशिक्षण में प्रथम सत्र में निदेशक, अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण सीमा जौबसारी ने सभी प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के उद्देश्यों तथा निदेशालय, अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण द्वारा संचालित नवाचारी व गुणवत्तापरक कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी।

प्रशिक्षण के शुभारंभ के अवसर पर विद्यालयी शिक्षा विभाग के महानिदेशक आलोक पांडे ने सभी प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे भविष्य में गुणवत्तापरक शिक्षा हेतु  कार्य करें। प्रशिक्षण के शुभारंभ के अवसर पर अपर निदेशक, सीमैट शशि चैधरी द्वारा सभी आंगतुकों का आभार व्यक्त करते हुए प्रशिक्षण सत्रों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। दिनांक 26 से 30 मई तक चलने वाले सत्रों में तनाव प्रबंधन, समय प्रबंधन, वित्तीय प्रबंधन, ऑनलाइन शिक्षण, कोविड-19, (बचाव व सुरक्षा), शैक्षिक नेतृत्व प्रबंधन,  सामुदायिक सहभागिता, आनंदम् आदि विषयों का पैडागॉजी तथा शिक्षक नवाचारों पर परिचर्चा आयोजित की जानी है। ऑनलाइन आयोजित यह प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा प्रशिक्षण कर क्षेत्र में नवाचार प्रयोग है। शुभारंभ के अवसर पर महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा, निदेशक, अकादमिक, शोध एवं प्रशिक्षण, अपर निदेशक, सीमैट, विभागाध्यक्ष, सीमैट मैनेजर, आईसीटी वर्चुअल लैब तथा संकाय सदस्य आदि उपस्थित थे।

इस वर्चुअल क्लासरूम योजना को वर्चुअल कम्युनिकेशन के माध्यम से वैल्यूएबल ग्रुप द्वारा श्स्टूडियो द प्रोजेक्टश् के तहत स्थापित किया जा रहा है। इसके लिए कंपनी इंटरएक्टिव टेक्नोलॉजी पर आधारित वी-सैट तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। यह टेक्नोलॉजी वी-सैट के माध्यम से  दूरदराज रहनेवाले छात्रों, शिक्षकों अथवा किसी भी शखघ््स को जुड़ने में मददगार साबित होती है। वर्चुअल क्लासरूम के माध्यम से दूरदराज रहनेवाले लोगों को सैटेलाइट आधारित टेक्नोलॉजी से जोड़कर जानकार शिक्षकों से शिक्षा हासिल करने में मदद करता है। इसके लिए टीवी स्क्रीन्स की मदद ली जाती है।

वर्चुअल कम्युनिकेशन विभिन्न इंडस्ट्री का नये आकार में ढालने में अहम भूमिका अदा कर रहा है। वैल्यूएबल ग्रुप ने अब तक मेडिकल, रीयल एस्टेट और प्रशिक्षुओं से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं को वी-सैट आधारित इंटररैक्टिव टेक्नोलॉजी के माध्यम से सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।




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