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July 23, 2019

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प्रशिक्षण करते समय गई रिक्रूट की जान

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आर्मी कैंट रानीखेत में शनिवार को स्वीमिंग पूल में तैराकी का प्रशिक्षण करते समय डूबने से काल के गाल में समाए रिक्रूट देवेंद्र सिंह संभल (20) की पार्थिव देह जैसे ही रविवार को धारी ब्लॉक स्थित उसके गांव बबियाड़ लाई गई, वहां कोहराम मच गया। जवान बेटे की पार्थिव देह को देख मां गोमती देवी और दो बड़े भाइयों का रो रोकर बुरा हाल हो गया।

इससे पूर्व कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र (केआरसी) में रिक्रूट की पार्थिव देह का रविवार को राजकीय अस्पताल में पुलिस व सैन्य अधिकारियों की मौजूदगी में पोस्टमार्टम किया गया। सैन्य अस्पताल में रिक्रूट को गार्ड ऑफ आनर देने के बाद सेना के वाहन से उसके पार्थिव शरीर को गांव भेज दिया है। सैन्य अधिकारियों ने बताया कि सैन्य सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा। पोस्टमार्टम के दौरान मृतक का भाई तारा सिंह, चाचा जीवन सिंह, संतोष सिंह सम्मल आदि भी मौजूद रहे।

बबियाड़ के ग्राम प्रधान युगल किशोर ने बताया कि देवेंद्र अविवाहित था। पिछले साल ही वह सेना में भर्ती हुआ था। उसके पिता शिवराज सिंह की एक साल पहले हार्टअटैक से मौत हुई थी। परिजन पिता की मौत के सदमे से उबरे तक नहीं थे कि जवान बेटे की मौत से परिवार में मातम छाया है। तमाम लोग सांत्वना देने उसके घर पहुंच रहे हैं।

पैतृक घाट में सोमवार को जवान की सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की जाएगी। विधायक राम सिंह कैड़ा, दुग्ध संघ लालकुआं के अध्यक्ष मुकेश बोरा, भाजपा नेता तारा दत्त पांडे, चंदन संभल, तारा सिंह, गोविंद मेहता, पूरन सुयाल, दीपक दानी, जगदीश नागरकोटी, कुंदन चिलवाल आदि ने शोक व्यक्त किया है।

रिक्रूट देवेंद्र सिंह सम्मल के भाई तारा सिंह ने बताया कि देवेंद्र को सेना में जाने का शौक बचपन से ही था। दो माह पूर्व 25 मार्च को वह सेना में भर्ती हुआ। इसके लिए वह सुबह और शाम रोज कड़ी मेहनत कर रहा था। चाचा जीवन सिंह ने बताया कि सेना में जाने के चक्कर में देवेंद्र ने बीएससी अंतिम वर्ष की परीक्षा तक नहीं दी, हालांकि वह पढ़ाई में भी काफी होशियार था। शनिवार की शाम पौने पांच बजे गांव में उन्हें हादसे की सूचना मिली।

25 मार्च को घर पर मनी थी खुशियां
मृतक रिक्रूट देवेंद्र सिंह तीन भाई और दो बहनों में सबसे छोटा था। दोनों भाई घर पर ही रहते हैं, जबकि दो बड़ी बहनों का विवाह हो चुका है। 25 मार्च को जब देवेंद्र सेना में भर्ती हुआ तो मां गोमती देवी सहित परिजनों ने जमकर खुशियां मनाई, लेकिन किसे मालूम था कि दो महीने बाद ही देवेंद्र उन्हें छोड़कर चला जाएगा।

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Post source : agencies

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