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कांग्रेस पांच सितारा होटलों में बैठकर चुनाव नहीं लड़ सकते : गुलाम नबी आजाद

कांग्रेस पांच सितारा होटलों में बैठकर चुनाव नहीं लड़ सकते : गुलाम नबी आजाद
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बिहार विधानसभा चुनावों के बाद से ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खुलकर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस में अंतर्कलह पर अब सीनियर नेता गुलाम नबी आजाद ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि आज कांग्रेस सबसे निचले स्तर पर है। पार्टी के बड़े नेताओं का कार्यकर्ता से संपर्क टूट गया है। पांच सितारा होटलों में बैठकर चुनाव नहीं लड़ सकते।

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि हमारे लोगों का ब्लॉक स्तर पर, जिला स्तर पर लोगों के साथ कनेक्शन टूट गया है। जब कोई पदाधिकारी हमारी पार्टी में बनता है तो वो लेटर पैड छाप देता है, विजिटिंग कार्ड बना देता है, वो समझता है बस मेरा काम ख़त्म हो गया, काम तो उस समय से शुरू होना चाहिए। हाल ही में हुए नुकसान के बारे में उन्होंने कहा कि हम सभी नुकसान के बारे में चिंतित हैं, खासकर बिहार और उपचुनाव परिणामों के बारे में। मैं नुकसान के लिए नेतृत्व को दोष नहीं देता। हमारे लोगों ने जमीन पर संबंध खो दिया है। उनकी पार्टी से प्यार होना चाहिए।



उन्होंने कहा कि पिछले 72 सालों में कांग्रेस सबसे निचले पायदान पर है। कांग्रेस के पास पिछले दो कार्यकाल के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद भी नहीं है। लेकिन कांग्रेस ने लद्दाख पहाड़ी परिषद चुनावों में 9 सीटें जीतीं, जबकि हम इस तरह के परिणाम की उम्मीद नहीं कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि मैं कोविड महामारी के कारण गांघियों को क्लीन चिट दे रहा हूं क्योंकि वे अभी बहुत कुछ नहीं कर सकते। हमारी मांगों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। वे हमारी अधिकांश मांगों के लिए सहमत हो गए हैं। यदि वे राष्ट्रीय विकल्प बनना चाहते हैं और पार्टी को पुनर्जीवित करना चाहते हैं तो हमारे नेतृत्व को चुनाव करना चाहिए। कांग्रेस नेता ने कहा कि जब तक हम हर स्तर पर अपने कामकाज के तरीके को नहीं बदलेंगे, चीजें नहीं बदलेंगी। नेतृत्व को पार्टी कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम देने और पदों के लिए चुनाव कराने की आवश्यकता है।

इससे पहले कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा था कि राहुल गांधी डेढ़ साल पहले यह बात साफ कर चुके हैं कि वे अब कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं बनना चाहते। उन्होंने यह भी कहा था कि मैं नहीं चाहता कि गांधी परिवार का कोई भी व्यक्ति उस पद पर काबिज हो। इस बात के डेढ़ साल बीत जाने के बाद मैं ये पूछता हूं कि कोई राष्ट्रीय पार्टी इतने लंबे समय तक अपने अध्यक्ष के बिना कैसे काम कर सकती है।मैं जानना चाहता हूं कि डेढ़ साल बाद भी हमारा अध्यक्ष नहीं है। कार्यकर्ता अपनी समस्या लेकर किसके पास जाएं।




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