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मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से भेंट की

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से भेंट की
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मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से भेंट की। भेंट के दौरान मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री के समक्ष ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के तहत हर खेत को पानी योजना के अन्तर्गत पर्वतीय राज्यों हेतु मानकों में परिवर्तन या शिथिलीकरण प्रदान किये जाने का प्रकरण रखा। जिसमें सरफेस माईनर इरिगेशन स्कीम में नहरों की पुनरोद्धार जीर्णोद्वार, सृदृढीकरण तथा विस्तारीकरण की योजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में नहर निर्माण की लागत अधिक होने के कारण वर्तमान प्रचलित गाईडलाईन रूपये 2.50 लाख प्रति हैक्टेयर लागत की सीमा को बढ़ाकर 3.50 लाख प्रति हैक्टेयर किये जाने का अनुरोध भी किया। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुम्भ के दृष्टिगत हरिद्वार में एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री से अनुरोध किया। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने इसके लिए प्रस्ताव भेजने को कहा। इस अवसर पर नमामि गंगे की प्रगति पर भी चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने  कहा कि ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के अन्तर्गत 651 लघु सिंचाई योजना की अवशेष केन्द्रांश की धनराशि रूपये 63.57 करोड़ की मांग का प्रस्ताव केन्द्र को भेजा गया है, इन निर्माणाधीन योजनाओं को यथाशीघ्र पूर्ण किये जाने हेतु यह धनराशि यथाशीघ्र अवमुक्त किये जाने का उन्होंने  केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री से अनुरोध किया। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य की 349.39 करोड़ रूपये की 422 लघु सिंचाई  की  नई योजनाओं का प्रस्ताव केन्द्रीय जल आयोग, आगरा के माध्यम से भारत सरकार को प्रेषित किया गया है, जिसे 19524 हैक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित किये जाने का प्रस्ताव है। उक्त योजना स्वीकृत कर वित्तीय वर्ष 2019-20 में रूपये 27.97 करोड़ केन्द्रांश अवमुक्त किये जाने का भी अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से भेंट दौरान ‘‘जल जीवन मिशन‘‘ जैसे अंत्यंत महत्वपूर्ण एवं महत्वकांक्षी योजना पर चर्चा की। उन्होंने उत्तराखण्ड राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत सुझाव दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों में विषम भौगोलिक परिस्थिति तथा बिखरी आबादी के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की लागत अत्यधिक आती है। फलतः परियोजना की संपूर्ण लागत का 5 प्रतिशत सामुदायिक अंशदान एकत्रित कर पाना व्यवहारिक रूप से अत्यधिक कठिन  है। इसका प्रभाव योजना की प्रगति पर पड़ना स्वाभाविक है। इस दृष्टि से पर्वतीय एवं विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों के संदर्भ में 5 प्रतिशत सामुदायिक अंशदान की शर्त को समाप्त किए जाने पर विचार किये जाने का अनुरोध किया। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र शेखावत ने मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के अनुरोध पर समुचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि  पर्वतीय एवं विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों के संदर्भ में ग्रामीण आबादी के अंदर बिछाए जाने वाले समग्र पाइपलाइन वितरण प्रणाली पर आने वाले व्यय को ही इन विलेज इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत के आगणन हेतु सम्मिलित किया जाए और इसी के सापेक्ष 5 प्रतिशत सामुदायिक अंशदान का निर्धारण किए जाने की व्यवस्था लागू की जाए। इसके अतिरिक्त अन्य समस्त व्ययों को को सामुदायिक अंशदान हेतु गणना के निमित्त इन विलेज इन्फ्रास्ट्रक्चर का अंश न मानकर इन पर होने वाला व्यय केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा पूर्व नियत अंश विभाजन के तहत परियोजना मद से किया जाए। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र शेखावत ने मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र द्वारा दिये गये सुझावों पर समुचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।

इस अवसर पर सचिव डॉ. भूपेन्द्र कौर औलख, श्री अरविन्द सिंह ह्यांकी, कुंभ मेलाधिकारी हरिद्वार श्री दीपक रावत भी उपस्थित थे।



शुक्रवार को नई दिल्ली में मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर से शिष्टाचार भेंट की। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र एवं केन्द्रीय मंत्री श्री जावडेकर के मध्य उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना-1 के अन्तर्गत 1153.591 कि0मी0 के 140 वनभूमि प्रभावित कार्य के विषय में चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से उक्त कार्यों की वन भूमि प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया मार्च 2020 तक पूर्ण करने के लिए अनुरोध किया। इसके साथ ही वन एवं पर्यावरण से संबंधित राज्य से जुडे विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई।
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