मुस्लिमों के खिलाफ चीन ने उठाया है सख्त कदम Where is Imran Khan Now? | Doonited.India

October 22, 2019

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मुस्लिमों के खिलाफ चीन ने उठाया है सख्त कदम Where is Imran Khan Now?

मुस्लिमों के खिलाफ चीन ने उठाया है सख्त कदम  Where is Imran Khan Now?
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चीन को लंबे समय से ये सवाल उठते रहे हैं कि चीन में उइगर मुस्लिमों को प्रताड़ित किया जाता है, उन्हें उनके मजहबी क्रिया कलापों से दूर रखा जाता है। आंकड़ों के मुताबिक चीन ने धार्मिक चरमपंथ और आतंकवाद को दबाने के नाम पर इस स्वायत्त क्षेत्र को कैदखाने में तब्दील कर दिया है।

स्थानीय अभियोजक दफ्तर के आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में यहां बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया। चीन में गिरफ्तार हर पांचवां व्यक्ति शिंजियांग प्रांत का रहने वाला था। जबकि, चीन की आबादी में यहां का हिस्सा सिर्फ दो फीसद है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के चीनी शोधकर्ता पैट्रिक पून का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तारियों में वृद्धि से साफ है कि उइगर और अन्य मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए न्यायिक व्यवस्था को भी हथियार बनाया गया।

मुस्लिमों खासकर उइगर मुसलमानों वाले शिंजियांग प्रांत में हाल के वर्षो में धार्मिक चरमपंथ और आतंकवाद को दबाने के लिए चीन ने सख्त कदम उठाए हैं। इसको लेकर दुनिया भर में चीन की निंदा भी होती है। लेकिन चीन अपनी नीति को सही ठहराता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक यहां गुपचुप तरीके से केस चलाकर लोगों को 20-20 साल कैद तक की सजा सुना दी जाती है और परिजनों को कुछ पता तक नहीं चलता। चीन पर ये आरोप लगते हैं कि उसने उइगरों को नजरबंद कर रखा है और उन्हें उनकी धार्मिक मान्यताओं से दूर कर री-एजुकेट किया जा रहा है।

शिंजियांग के हालात पर लिखने वाले प्रोफेसर डोनाल्ड सी. क्लार्क ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि यहां के जजों से निष्पक्ष न्याय की उम्मीद ही बेमानी है। चीन में मानवाधिकरों पर काम करने वाली फ्रांसिस इव के मुताबिक अगस्त, 2016 में चेन क्यांगो की प्रांत के कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख बनने के बाद से गिरफ्तारियों में भारी वृद्धि हुई। विरोधियों के प्रति क्वांगो ने बहुत ही सख्त रवैया अपनाया था।

बता दें कि चीन उइगर मुसलमानों को लेकर पूछे जाने वाले सवालों का नियमित रूप से जवाब देता आया है और इसका कहना है कि इसकी नीतियां शिंजियांग में स्थायित्व और शांति लाने की हैं। यही कारण है कि अशांत क्षेत्रों में कई चीजों पर रोक लगा दी गई जिनमें 10 लाख से अधिक उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों को इंटरनेट से दूर रखना शामिल है। चीन सरकार का कहना है कि वह जो भी कर रहा है अपने की एकता तथा अखंडता बनाए रखने के लिए कर रहा है।

10 लाख से अधिक उइगर मुसलमान नजरबंद
एक अमरीकी आकलन का हवाला देते हुए ब्लूमबर्ग ने कहा है कि चीनी अधिकारियों ने 10 लाख से अधिक उईगरों को नजरबंद कर रखा है। चूंकि मस्जिदों को बंद कर दिया गया है तथा शिनजियांग, जो किसी समय प्राचीन सिल्क रोड व्यापार मार्ग पर पड़ता था, की सीमा के पार आवागमन पर प्रतिबंध के कारण इसके राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नए व्यापारिक मार्गों को बनाने के प्रयासों में एक ब्लैक होल बनने की आशा पैदा हो गई है।

सी.आई.ए. की पुरानी रिपोर्टें देखकर यह समझा जा सकता है कि ये चालें 1950 के दशक से ही जारी हैं। जनवरी, 1951 में जारी ऐसी ही एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सिनकियांग (शिनजियांग) में मुसलमान साम्यवादी शासन से असंतुष्ट हैं। आधिकारिक तौर पर यहां प्रार्थना करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है लेकिन युवाओं का ध्यान भटकाने के लिए प्रार्थना के समय आर्केस्ट्रा तथा डांस आदि का जोर-शोर से आयोजन किया जाता है। 4 से अधिक लोगों के इकट्ठे होने पर रोक है।

सितम्बर, 1952 की सी.आई.ए. की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि जून, 1952 से पहले दक्षिण-पश्चिमी सिनकियांग प्रांत में चीनी साम्यवादी सरकार ने उन सभी लोगों को वापस भेजने की नीति अपनाई थी जिनके परिवार मूल रूप से सिनकियांग में उस क्षेत्र से आए थे जो अब पश्चिमी पाकिस्तान है।

उन्हें वापस भेजने के बाद उनकी सम्पत्ति को कब्जे में ले लिया गया है। वापस भेजे जाने वाले लोगों के साथ एक सशस्त्र गार्ड सिनकियांग-पाकिस्तान सीमा तक जाता था। आज चीनी अधिकारियों ने कई उईगर महिलाओं को नजरबंद किया है जिन्होंने गिलगित-बाल्टिस्तान से आए पाकिस्तानी व्यवसायियों के साथ विवाह किया था। ऐसा पाकिस्तान की नाराजगी के कारण था।

सी.आई.ए. ने बताया कि पूर्वी तुुॢकस्तान में पहले चीनी सैनिकों के आने के 2 वर्ष बाद 1952 में सभी प्रमुख सरकारी विभागों की अध्यक्षता चीनी अधिकारी करते थे, जिन्हें रूसी अधिकारी सलाह देते थे। उईगरों पर विश्वास नहीं था इसलिए पर उन्हें उनके सभी पदों से हटा दिया गया, ठीक वैसा ही आज भी है।

सी.आई.ए. की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1952 के अंत तक दक्षिण-पश्चिमी सिनकियांग से यात्रा करने की इजाजत नहीं थी। यहां अधिकारी बड़ी संख्या में उन लोगों को हटाने में जुटे थे, जिन पर 1944 में चीनी शासक के खिलाफ विद्रोह में भाग लेने का आरोप था।

सी.आई.ए. की रिपोर्ट में कहा गया है कि काशगर के इर्द-गिर्द बनी किलेबंदी की दीवार को जबरन मजदूरों द्वारा गिरा दिया गया और दोनों शहरों की सभी महिलाओं को इस विनाश के कारण पैदा मलबे को हटाने के लिए लगाया गया। काशगर के पुरुषों को सड़कों तथा इमारतों के निर्माण कार्य में जबरदस्ती लगाया गया।

शीघ्र ही होतान स्थित सिल्क उद्योग सहित सभी लाभकारी व्यवसायों पर साम्यवादी अधिकारियों ने कब्जा कर लिया। निजी व्यवसाय को हतोत्साहित किया गया तथा लगभग सभी दुकानों को सरकारी स्वामित्व वाले को-आप्रेटिव स्टोरों में बदल दिया गया। दुकानदारों को दिया जाने वाला वेतन बस उनके रहन-सहन के खर्चे को ही पूरा करता था।

उसी रिपोर्ट में शुद्धिकरण, गिरफ्तारियों तथा फांसी देने जैसे कार्यों की एक लम्बी सूची का हवाला दिया गया था। 60 से अधिक वर्ष बाद भी अशांत क्षेत्र में उग्र नियंत्रण तथा जबरन अनुकूलता अभी भी जारी है।

‘द पीपुल्स डेली’ की रिपोर्ट के अनुसार ‘सामाजिक स्थिरता में सुधार तथा गरीबी उन्मूलन’ के लिए वर्ष की पहली तिहाई के दौरान 4,61,000 गरीब लोगों को क्षेत्र के अन्य हिस्सों में काम करने के लिए स्थानांतरित किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिनजियांग सरकार की योजना दक्षिणी होतान तथा काशगर प्रांतों से 2019 के अंत तक 1 लाख और लोगों को कहीं और नौकरी के लिए स्थानांतरित करने की योजना है।

चाइनीज एकैडमी आफ सोशल साइंसिज के ‘विशेषज्ञ’ यू शाओशिआंग ने बताया कि शिनजियांग में गरीबी उन्मूलन का कार्य अन्य स्थानों के मुकाबले अधिक कठिन है क्योंकि गरीबी के अतिरिक्त यहां जातीय मुद्दों का भी सामना करना पड़ता है। त्रासदी यह है कि यह क्षेत्र ‘मानवतावादी’ बैल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बी.आर. आई.) का एक केन्द्र है जो स्थानीय लोगों के लिए समृद्धि तथा खुशी लाने वाला है। चीन को न केवल दक्षिण में अपने मित्रों की ओर से घुसपैठ का बल्कि सीरिया से प्रशिक्षित होकर शिनजियांग लौटने वाले उइगरों से भी गम्भीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

 

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Post source : agency

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