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चीन: 7वें दौर के कमांडर-स्तरीय वार्ता सकारात्मक और रचनात्मक

चीन: 7वें दौर के कमांडर-स्तरीय वार्ता सकारात्मक और रचनात्मक
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भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को सुलझाने के लिए दोनों देशों के बीच वार्ताओं का दौर जारी है। इसी क्रम में सोमवार को दोनों देशों के बीच वरिष्ठ कमांडरों की सातवें दौर की वार्ता चुशुल में हुई। भारतीय सेना के प्रवक्ता ने मंगलवार को बताया कि वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण पर डिसइंगेजमेंट (सैनिकों का विघटन) पर विचार विमर्श किया गया।




प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच हुए विचार सकारात्मक और रचनात्मक होने के साथ एक-दूसरे की स्थिति की समझ को और बेहतर करने वाले थे। दोनों पक्षों ने सैन्य और राजनयिक माध्यमों से वार्ताएं जारी रखने पर सहमति जताई। प्रवक्ता ने बताया कि वार्ता के दौरान दोनों पक्ष सैनिकों के विघटन के लिए जल्द से जल्द एक पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचने की बात कही।

भारतीय सेना के प्रवक्ता ने बैठक की जानकारी देते हुए कहा कि दोनों की पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि दोनों देशों के नेता जिस अहम सहमति पर पहुंचे हैं उसका पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रवक्ता ने कहा कि दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि किसी भी प्रकार के मतभेद को विवाद में न परिवर्तित किया जाए और संयुक्त रूप मिल कर से सीमा क्षेत्रों पर शांति सुनिश्चित की जाए।



बीजिंग द्वारा जारी संयुक्त प्रेस बयान के अनुसार दोनों पक्षों ने विचारों के आदान-प्रदान में बौद्धिकता और गहराई दिखाई और भारत-चीन सीमा का पश्चिमी क्षेत्र में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल के क्षेत्र के साथ-साथ फ्रंट-लाइन सैनिकों के विस्थापन पर एक-दूसरे के पोजिशन पर समझ को बढ़ाया।

चीन द्वारा बयान में आगे कहा गया, दोनों पक्ष का दृष्टिकोण है कि बैठक सकारात्मक और रचनात्मक थी और दोनों देशों के नेताओं द्वारा विवादों में मतभेदों को न मोड़ने, सीमा क्षेत्रों में शांति और शांति की रक्षा करने के लिए महत्वपूर्ण समझ को ईमानदारी से लागू करने के लिए सहमत हुए है।

साथ ही कहा गया कि भारत और चीन दोनों सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से संवाद और संचार बनाए रखने के लिए सहमत हुए हैं और जल्द से जल्द सैनिकों के विस्थापन के लिए एक उचित, तर्कसंगत और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान पर पहुंचेंगे। कॉर्प्स कमांडर-स्तरीय वार्ता के अंतिम दौर के दौरान चीनी सेना ने पैंगोंग झील के दक्षिणी तट के आसपास मुखपारी, रेजांग ला और मगर पहाड़ी क्षेत्रों में कई सामरिक ऊंचाइयों से भारतीय सेना द्वारा सैनिकों की वापसी पर जोर दिया।



मालूम हो, चीनी सेना द्वारा 29 और 30 अगस्त की रात को पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर डराने-धमकाने की कोशिश के बाद भारतीय सैनिकों ने उपरोक्त सामरिक ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया था। यही कारण है कि भारत यह सुनिश्चित करता रहा है कि सभी गतिरोध बिंदुओं पर एक साथ विस्थापन प्रक्रिया शुरू हो।

गौरतलब है गत 21 सितंबर को छठे दौर की सैन्य वार्ता के बाद दोनों पक्षों ने कई फैसलों की घोषणा की थी, जिसमें फ्रंटलाइन पर अधिक सैनिकों को नहीं भेजने, एकतरफा रूप से जमीन पर स्थिति को बदलने से बचने और आगे कोई भी कार्रवाई करने से बचना शामिल है, ताकि मामले को अतिरिक्त उलझने से बचाया जा सके।



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