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Poetry - कविता कुंज
Bedu Pako Baro Masa बेडु पाको बारो मासा

Bedu Pako Baro Masa बेडु पाको बारो मासा

Bedu Pako Baro Masa (Kumaoni: बेडु पाको बारो मासा, English: Figs do ripen round the year) is an Uttarakhandi folk song which was composed by Mohan Upreti, B. M. Shah and written by  Brijendra Lal Shah. This song was composed, written and first performed in early 1950s and has become immensely popular no...
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चोरी हो जाते है सपने : अशोक कुमार शुक्ला

चोरी हो जाते है सपने : अशोक कुमार शुक्ला

क्या लिखना थायाद तो हैलेकिन कैसे लिखूं..?छुटकी का संदेशा आया है“पता नहीं क्यों..नींद नहीं आतीसारी सारी रात यूँ ही आँखों में गुजर जाती हैआँख अगर लगती भी पल भर कोतो दीखते हैं अजीब अजीब से सपनेमैं क्या करूँ दद्दा…?”मैंने भी सारे परंपरागत उपदेश उंडेल दिए इनबॉक्स में...
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भोटिए :  राजा खुगशाल

भोटिए : राजा खुगशाल

खेतों में पकने लगती है गेहूँ की फ़सलधीरे-धीरे गर्माने लगता है मौसमभेड़-बकरियों के अपने झुण्ड के साथभोटिए घर लौटते हैं पीठ पर ऊन के गट्ठर लादेनवजात मेमनों को कन्धों पर रखेवे नदी-नदी, जंगल-जंगल उत्तर की ओर बढ़ते हैंगंगा-यमुना के उद‍गम की ओरभाबर के वनों से तिब्बत की सरहद तक कोई भी पर्वत,कोई भी जंगलअगम-अगोच...
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जब अटल ने कहा, ‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा’

जब अटल ने कहा, ‘मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं, लौटकर आऊंगा’

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,ये गीत गुनगुनाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी का सिलसिला आज थम गया. देश के 10वें प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का 93वें साल की उम्र में निधन हो गया. भारत रत्न पूर्व अटल बिहारी वाजपेयी ने भले ही 1942 में भारतीय राजनीति में कदम ...
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सुप्रसिद्ध कवि और वरिष्ठ पत्रकार मंगलेश डबराल नहीं रहे

सुप्रसिद्ध कवि और वरिष्ठ पत्रकार मंगलेश डबराल नहीं रहे

साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि और वरिष्ठ पत्रकार मंगलेश डबराल कोरोना से संक्रमित होने के कारण अस्पताल में भर्ती है और उनकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता, हिंदी भाषा के प्रख्यात लेखक, कवि और पत्रकार श्री मंग...
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‘दो गज सही मगर यह मेरी मिल्कियत तो है.. ऐ मौत तूने मुझे जमीदार कर दिया’ – राहत इंदौरी का निधन

‘दो गज सही मगर यह मेरी मिल्कियत तो है.. ऐ मौत तूने मुझे जमीदार कर दिया’ – राहत इंदौरी का निधन

मशहूर शायर राहत इंदौरी का निधन हो गया है। कोरोना वायरस से संक्रमित 70 साल के राहत इंदौरी ने इंदौर के अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सैम्स) में आखिरी सांस ली। इंदौरी के बेटे और युवा शायर सतलज राहत ने बताया, “कोविड-19 के प्रकोप के कारण मेरे पिता पिछले साढ़े चार महीने से घर में ...
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देहरादून वाला हूँ : नरेंद्र सिंह नेगी

देहरादून वाला हूँ : नरेंद्र सिंह नेगी

अपणुं सी दिखेंणु छे रे, लगणुं भल सि मौ को छे – अपणुं सी दिखेंणु छे रे, लगणुं भल सि मौ को छे कां बे ऐ रे पहाड़ी भुला, के जिला के गौं को छे? के जिला के गौं को छे? गढवालि कुमौं नि हूं, ना भुला, ना भोला-भाला हूं – गढवालि कुमौं नि हूं, ...
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दो मिनट खुद को उधार दो Written By हिमांशु ।।

दो मिनट खुद को उधार दो Written By हिमांशु ।।

दो मिनट। जो इधर उधर से फुर्सत मिले तो दो मिनट खुद को उधार दो, इतना भी नही कर सकते, तो, जिंदगी ये धिक्कार दो, अरे! क्या तुम्हें सिहरन नही होती, क्या तुम डरते नहीं? क्या अपनो की बेबसी सुनते नही? या उनके आसुँ दिखाई नही देते, या वो काँपते होंठ, तुम पढ़ नही सकते? ...
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आओ फिर से दिया जलाएँ

आओ फिर से दिया जलाएँ

भरी दुपहरी में अँधियारा भरी दुपहरी में अँधियारा, सूरज परछाई से हारा अंतरतम का स्नेह निचोड़े अंतरतम का स्नेह निचोड़े, बुझी हुई बाती सुलगाये आओ फिर से दिया जलाये हम पड़ाव को समझे मंज़िल हम पड़ाव को समझे मंज़िल, लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल वर्तमान के मोहजाल में वर्तमान के मोहजाल में आने वाला कल ...
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Muktak by Jasveer Singh Haldhar

दोहे -हास्य व्यंग —————————— 1 गधे जलेबी खा रहे ,घोड़े खायें घास । अनपढ़ नेता जी करे ,टी वी पर बकवास ।। 2 काने को काना कहो ,तुरत लड़ाई होय । प्रेम प्यार से पूंछ लो , कहाँ आँख दी खोय ।। 3 रडुआ रोया रात को ,कर गोरी को याद । नारी बिन सब ...
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गुनाह पासपोर्ट का था दर-बदर राशनकार्ड हो गए

गुनाह पासपोर्ट का था दर-बदर राशनकार्ड हो गए

गुनाह पासपोर्ट का था दर-बदर राशनकार्ड हो गए..   सुन रहा है ना तू?   रथ के पहिये थम गये हैं। मुनादी फिरा दी गयी है कि जो जहाँ हैं वही रुक जाएं। एक भयंकर जीव मानवता को निगलने निकल पड़ा है, उसके रास्ते में जो कोई आएगा, उसका काल बन जाएगा! सारे रास्ते सुनसान ...
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हरिवंश राय बच्चन जी की एक सुंदर कविता

हरिवंश राय बच्चन जी की एक सुंदर कविता

हरिवंश राय बच्चन जी की एक सुंदर कविता, जिसके एक-एक शब्द को बार-बार पढ़ने को मन करता है-_ ख्वाहिश नहीं मुझे मशहूर होने की,” आप मुझे पहचानते हो बस इतना ही काफी है। अच्छे ने अच्छा और बुरे ने बुरा जाना मुझे, जिसकी जितनी जरूरत थी उसने उतना ही पहचाना मुझे! जिन्दगी का फलसफा भी ...
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Gazal by Mannu Bhatt

चलें…     चलो  इसबार एक ऊँची उड़ान पर चलें, चलो इस आसमान से उस आसमान पर चलें।   किसी ने किसी को धोखा दिया किसी ने किसी को, कम से कम यहाँ हम तो इश्क़ के ईमान पर चलें।   हवा मेरा रुख बदल देना चाहती है बहुत, मैं कहता हूँ हाथ थामें और इम्तेहान ...
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मेरी दुनिया… By Jyotsana Khatri

मेरी दुनिया… By Jyotsana Khatri

आज छत पर गई तो देखा, कुछ गमलों में सदाबहार खूब खिला है, तो वहीं कुछ दूसरे पौधे भी खूब बढ़े हो चले थे, जिन्हें पिछली बार रोप गई थी… कुछ गमलों में घास उग आई थी तो साफ की, और दूसरा पौधा रोपा उसमें भी, वहीं एक में गिलोय की बेल लहराने लगी है, ...
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Kavita by Kunj Bihari

करुण  कण्ठ से गाय रंभाती   सुन लो मेरी पुकार  / कान्हा  ने मुझको  अपनाया  करते तुम   इनकार // सुनो  तुम बात हमारी  , कहे  तुमको  महतारी………… भारतवर्ष  में सदियों  से ही होती मेरी पूजा  / वेद  पुराणों  में भी मेरा नाम हमेशा   गूँजा // स्वर्णिम  दिन लोटा  दो वापिस  समझो मुझे  न  भार,……… करुण………. कान्हा ...
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