Poetry – कविता कुंजDoonited News
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Poetry - कविता कुंज
बैठे ठाले—- आभा पैन्यूली

बैठे ठाले—- आभा पैन्यूली

उसकी हस्ती में खुद को जज्ब करने की ख्वाहिशें बूंद पानी की कभी -पानी में नजर आती है ? मलिका-ऐ-हुस्न होना काफी नहीं होता – जोशे जुनूं दिल में ,लुत्फे जुबां भी रखा करो। आहें भरीं तो ऐसी कि बदरा भी उड़ चले निकले थे तुझे ढूंढने –खुद ही खो गए। नाम भी देना है ...
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Gazal by Mannu Bhatt

Gazal by Mannu Bhatt

चलें… चलो  इसबार एक ऊँची उड़ान पर चलें, चलो इस आसमान से उस आसमान पर चलें।   किसी ने किसी को धोखा दिया किसी ने किसी को, कम से कम यहाँ हम तो इश्क़ के ईमान पर चलें।   हवा मेरा रुख बदल देना चाहती है बहुत, मैं कहता हूँ हाथ थामें और इम्तेहान पर चलें। ...
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देहरादून वाला हूँ : नरेंद्र सिंह नेगी

देहरादून वाला हूँ : नरेंद्र सिंह नेगी

अपणुं सी दिखेंणु छे रे, लगणुं भल सि मौ को छे – अपणुं सी दिखेंणु छे रे, लगणुं भल सि मौ को छे कां बे ऐ रे पहाड़ी भुला, के जिला के गौं को छे? के जिला के गौं को छे? गढवालि कुमौं नि हूं, ना भुला, ना भोला-भाला हूं – गढवालि कुमौं नि हूं, ...
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Kavita by Kunj Bihari

Kavita by Kunj Bihari

करुण  कण्ठ से गाय रंभाती   सुन लो मेरी पुकार  / कान्हा  ने मुझको  अपनाया  करते तुम   इनकार // सुनो  तुम बात हमारी  , कहे  तुमको  महतारी………… भारतवर्ष  में सदियों  से ही होती मेरी पूजा  / वेद  पुराणों  में भी मेरा नाम हमेशा   गूँजा // स्वर्णिम  दिन लोटा  दो वापिस  समझो मुझे  न  भार,……… करुण………. कान्हा ...
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Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

Kavita by Dinesh Pratap Singh Chauhan

सबको चिंता देश की और है फ़िक्र देश की जनता की लेकिन फिर बदहाल देश क्यों देश की जनता रोती है क्या कोई है अफ़सोस तुझे क्या शर्म आँख में रहती है ? तू बता देश की राजनीति ग़ैरत  तेरी क्या कहती है ?   गोरे  दुश्मन गए देश से काले फिर ज़ल्लाद हुए आम ...
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रिश्ते पुराने होते हैं, पर “मायका” पुराना नही होता। By  अमृता प्रीतम

रिश्ते पुराने होते हैं, पर “मायका” पुराना नही होता। By अमृता प्रीतम

रिश्ते पुराने होते हैं, पर “मायका” पुराना नही होता। जब भी जाओ ….. अलाये-बलायें टल जाये, यह दुआयें मांगी जाती हैं। यहां-वहां बचपन के कतरे बिखरे होते हैं, कहींहंसी,कहीं खुशी,कहीं आंसू सिमटे होते हैं। बचपन का गिलास…. कटोरी …., खाने का स्वाद बढ़ा देते हैं। अलबम की तस्वीरें, कई क...
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Gazal by Kavi Rajesh Purohit

Gazal by Kavi Rajesh Purohit

गरीबों में ईश्वर जिसने खोजा है। असल में वहीं करतार रहता है।।   योजनाओं का लाभ मिले उन्हें। जो असल में हकदार रहता है।।   मेरे शहर में डेंगू ने पैर पसारे है। हर कोई अब  बीमार रहता है।।   घरों में अपनत्व नहीं रहा जबसे। हर कोई यहाँ  लाचार रहता है।।   करूँ किस ...
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ये औरतें भी न! By Nanda Jakhmola Kestwal

ये औरतें भी न! By Nanda Jakhmola Kestwal

ये औरतें भी न! दो मिनट की आरामदायक और  बच्चों के पसंद की ज़ायकेदार मैगी को छोड़,  किचन में गर्मी में तप कर  हरी सब्ज़ियाँ बनाती फिरती हैं। बच्चे मुँह बिचकाकर  नाराज़गी दिखलाते हैं सो अलग, फिर भी बाज नहीं आती। ! ये औरतें भी न, जब किसी बात पे दिल दुखे , तो घर ...
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खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी…  By: सुभद्रा कुमारी चौहान

खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी… By: सुभद्रा कुमारी चौहान

सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी,बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी,गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी,दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी।चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी,बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।। ...
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माँ : By दिनेश चमोला ‘शैलेश’

माँ : By दिनेश चमोला ‘शैलेश’

रात-रात जो जाग कर, देती जीवन छांव । माँ, वह बरगढ प्रेम का, आंचल जिसके गांव ।।1।। सपने सारे बेच कर, गिरबी रखती भाव ।10 जीवन जो परहित जिए, मां, वह शील स्वभाव ।।2।। माँ बरगद छतनार है, नेह झूलती बेल । स्वारथ के पंछी करें, आंचल जिसके खेल ।।3।। माँ बदरी केदार है, मां ...
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सूरदास: वात्सल्य रस के सम्राट

सूरदास: वात्सल्य रस के सम्राट

सूरदास जी वात्सल्य रस के सम्राट माने जाते हैं। उन्होंने श्रृंगार और शान्त रसों का भी बड़ा मर्मस्पर्शी वर्णन किया है। सूरदास की जन्मतिथि एवं जन्मस्थान के विषय में विद्वानों में मतभेद है। “साहित्य लहरी’ सूर की लिखी रचना मानी जाती है। इसमें साहित्य लहरी के रचना-काल के सम्बन्ध में निम्न पद मिलता...
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कबीरदास: हिंदी साहित्य के महिमामण्डित व्यक्तित्व

कबीरदास: हिंदी साहित्य के महिमामण्डित व्यक्तित्व

कबीर हिंदी साहित्य के महिमामण्डित व्यक्तित्व हैं। कबीर के जन्म के संबंध में अनेक किंवदन्तियाँ हैं। कुछ लोगों के अनुसार वे रामानन्द स्वामी के आशीर्वाद से काशी की एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से पैदा हुए थे, जिसको भूल से रामानंद जी ने पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया था। ब्राह्मणी उस नवजात शिशु को ...
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Hermann Karl Hesse

Hermann Karl Hesse

Hermann Karl Hesse ( 2 July 1877 – 9 August 1962) was a German-born Swiss poet, novelist, and painter. His best-known works include Demian, Steppenwolf, Siddhartha, and The Glass Bead Game, each of which explores an individual’s search for authenticity, self-knowledge and spirituality.
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Every Day Is #WomensDay #Doonited Celebrates Womanhood.

Every Day Is #WomensDay #Doonited Celebrates Womanhood.

Dear Ladies, Thank you very much for being a part of Doonited. We are adding individual members profile set to know each other well first, second like to showcase your talent among “Uttarakhand” for various future activities. In this way you can reach with your noble & talented work in larger audien...
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Gazal by Shanti Swaroop Mishra

Gazal by Shanti Swaroop Mishra

कितना मतलबी है जमाना, नज़र उठा कर तो देख कोंन कितना है तेरे क़रीब, नज़र उठा कर तो देख न कर यक़ीं सब पर, ये दुनिया बड़ी ख़राब है दोस्त, आग घर में लगाता है कोंन, नज़र उठा कर तो देख भला आदमी के गिरने में, कहाँ लगता है वक़्त अब, कोई कितना गिर चुका है, नज़र उठा कर तो देख क्यों ईमान बेच देते हैं लोग, बस कौड़ियों में अप...
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चोरी हो जाते है सपने : अशोक कुमार शुक्ला

चोरी हो जाते है सपने : अशोक कुमार शुक्ला

क्या लिखना थायाद तो हैलेकिन कैसे लिखूं..?छुटकी का संदेशा आया है“पता नहीं क्यों..नींद नहीं आतीसारी सारी रात यूँ ही आँखों में गुजर जाती हैआँख अगर लगती भी पल भर कोतो दीखते हैं अजीब अजीब से सपनेमैं क्या करूँ दद्दा…?”मैंने भी सारे परंपरागत उपदेश उंडेल दिए इनबॉक्स में...
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भोटिए :  राजा खुगशाल

भोटिए : राजा खुगशाल

खेतों में पकने लगती है गेहूँ की फ़सलधीरे-धीरे गर्माने लगता है मौसमभेड़-बकरियों के अपने झुण्ड के साथभोटिए घर लौटते हैं पीठ पर ऊन के गट्ठर लादेनवजात मेमनों को कन्धों पर रखेवे नदी-नदी, जंगल-जंगल उत्तर की ओर बढ़ते हैंगंगा-यमुना के उद‍गम की ओरभाबर के वनों से तिब्बत की सरहद तक कोई भी पर्वत,कोई भी जंगलअगम-अगोच...
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