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‘दो गज सही मगर यह मेरी मिल्कियत तो है.. ऐ मौत तूने मुझे जमीदार कर दिया’ – राहत इंदौरी का निधन

‘दो गज सही मगर यह मेरी मिल्कियत तो है.. ऐ मौत तूने मुझे जमीदार कर दिया’ – राहत इंदौरी का निधन

मशहूर शायर राहत इंदौरी का निधन हो गया है। कोरोना वायरस से संक्रमित 70 साल के राहत इंदौरी ने इंदौर के अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सैम्स) में आखिरी सांस ली। इंदौरी के बेटे और युवा शायर सतलज राहत ने बताया, “कोविड-19 के प्रकोप के कारण मेरे पिता पिछले साढ़े चार महीने से घर में ...
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एक शाम पं. बिरजू महाराज और कथक के साथ उनके रोमांस के नाम

एक शाम पं. बिरजू महाराज और कथक के साथ उनके रोमांस के नाम

देहारदून:  सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर पर लोक-कल्याण एवं मानवता की भलाई के लिए समर्पित संगठन, प्रभा खेतान फाउंडेशन ने एसडब्लूएआर के सहयोग से एक मुलाकात नामक अपनी पहल के जरिए कथक उस्ताद पं. बिरजू महाराज और उनकी शिष्या विदुषी सास्वती सेन के साथ बातचीत के एक वर्चुअल सेशन का आयोजन किया। उस्ताद की पोती एवं कथक न...
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‘देवदार व बोगेनविलिया’ का मोहब्बतनामा, अब केवल यादों में

‘देवदार व बोगेनविलिया’ का मोहब्बतनामा, अब केवल यादों में

5 जुलाई 2015 को रविवार की सुबह ग्यारह बजे के आस-पास का समय था जब मेरे कदमों ने पहली बार अल्मोड़ा की धरती को छुआ था। मेरे लिए नया शहर था उस समय। प्राकृतिक छटा से भरपूर। जब हल्द्वानी सुबह सात बजे ट्रेन पहुंची तो तलाश हुई अल्मोड़ा जाने वाली टैक्सी की। टैक्सी से अल्मोड़ा ...
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देहरादून वाला हूँ : नरेंद्र सिंह नेगी

देहरादून वाला हूँ : नरेंद्र सिंह नेगी

अपणुं सी दिखेंणु छे रे, लगणुं भल सि मौ को छे – अपणुं सी दिखेंणु छे रे, लगणुं भल सि मौ को छे कां बे ऐ रे पहाड़ी भुला, के जिला के गौं को छे? के जिला के गौं को छे? गढवालि कुमौं नि हूं, ना भुला, ना भोला-भाला हूं – गढवालि कुमौं नि हूं, ...
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How colonial India fought locust attacks – and what we could learn from those tactics

How colonial India fought locust attacks – and what we could learn from those tactics

One simple strategy: protect birds that eat the predatory insects. As India struggles to contain the Covid-19 pandemic, it faces a new challenge. Several parts of the country have experienced heavy infestations of locusts – an insect that devours crops and foliage, often leaving devastation in its wake....
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भारतीय भाषाओं में पत्रकारिता का आरम्भ और हिन्दी पत्रकारिता

भारतवर्ष में आधुनिक ढंग की पत्रकारिता का जन्म अठारहवीं शताब्दी के चतुर्थ चरण में कलकत्ता, बंबई और मद्रास में हुआ। 1780 ई. में प्रकाशित हिके (Hickey) का “कलकत्ता गज़ट” कदाचित् इस ओर पहला प्रयत्न था। हिंदी के पहले पत्र उदंत मार्तण्ड(1826) के प्रकाशित होने तक इन नगरों की ऐंग्लोइंडियन अंग्रेजी प...
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दो मिनट खुद को उधार दो Written By हिमांशु ।।

दो मिनट खुद को उधार दो Written By हिमांशु ।।

दो मिनट। जो इधर उधर से फुर्सत मिले तो दो मिनट खुद को उधार दो, इतना भी नही कर सकते, तो, जिंदगी ये धिक्कार दो, अरे! क्या तुम्हें सिहरन नही होती, क्या तुम डरते नहीं? क्या अपनो की बेबसी सुनते नही? या उनके आसुँ दिखाई नही देते, या वो काँपते होंठ, तुम पढ़ नही सकते? ...
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आइए जानते हैं गढ़वाल की ब्राहमण जातियों का इतिहास..

आइए जानते हैं गढ़वाल की ब्राहमण जातियों का इतिहास..

गढ़वाल में ब्राह्मण जातियां मूल रूप से तीन हिस्सो में बांटी गई है -1-सरोला, 2-गंगाड़ी 3-नाना । सरोला और गंगाड़ी 8 वीं और 9वीं शताब्दी के दौरान मैदानी भाग से उत्तराखंड आए थे। पंवार शासक के राजपुरोहित के रूप में सरोला आये थे। गढ़वाल में आने के बाद सरोला और गंगाड़ी लोगों ने नाना गोत्र ...
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जरा याद करो कुर्बानी: भारतीय इतिहास में पेशावर कांड के नायक वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली

जरा याद करो कुर्बानी: भारतीय इतिहास में पेशावर कांड के नायक वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली

वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली (25 दिसम्बर, 1891 – 1 अक्टूबर 1979) को भारतीय इतिहास में पेशावर कांड के नायक के रूप में याद किया जाता है। २३ अप्रैल १९३० को हवलदार मेजर चन्द्र सिंह गढवाली के नेतृत्व में रॉयल गढवाल राइफल्स के जवानों ने भारत की आजादी के लिये लड़ने वाले निहत्थे पठानों पर गोली ...
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Who will be the winners in a post-pandemic economy?

Who will be the winners in a post-pandemic economy?

Businesses that use cloud computing will not buckle under the pressure of the coronavirus pandemic. Further automation and artificial intelligence will enhance the resilience of supply chains. Successful businesses will have a combination of resilience and agility. COVID-19 is putting the global economy...
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चार्ली चैपलिन का 131वां जन्मदिवस

चार्ली चैपलिन का 131वां जन्मदिवस

चार्ली चैपलिन का 131वां जन्मदिवस, जानिए उनके रोचक किस्से हॉलीवुड एक्टर चार्ली चैपलिन का आज 131वां बर्थडे है, जिन्हें कॉमेडी का बादशाह भी कहते थे । चार्ली चैपलिन वो नाम जिसे सुनते ही हमारे चेहरे पर मुस्कान आ जाती है। कॉमेडी की दुनिया में सबसे पहला नाम चार्ली चैपलिन का ही आता है । हॉलीवुड ...
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मैं उत्तराखंड बोल रहा हूँ, मैं उदास हूँ, परेशान हूँ, बेचैन हूँ…

मैं उत्तराखंड बोल रहा हूँ, मैं उदास हूँ, परेशान हूँ, बेचैन हूँ…

मैं उत्तराखंड बोल रहा हूँ। हाँ! सही पहचाना मैं वही हूँ जिसके लिए मेरे अपने मुझ से दूर हो गये क्योंकि मेरे जन्म के लिए उन्होंने जो संघर्ष किया, जिस कारण उन्हें अपने प्राण देंने पड़े। अपने जन्म के लिए जो लड़ाई मैंने लड़ी उसके लिए मैं कभी पीछे नहीं हटा मैंने लाठियाँ खाईं। सीने ...
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