साईं स्कूल ऑफ नर्सिंग में स्तनपान ओरिएंटेशन कार्यशाला आयोजित | Doonited.India

December 11, 2019

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साईं स्कूल ऑफ नर्सिंग में स्तनपान ओरिएंटेशन कार्यशाला आयोजित

साईं स्कूल ऑफ नर्सिंग में स्तनपान ओरिएंटेशन कार्यशाला आयोजित
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विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत सोमवार को सोसाइटी फाॅर हैल्थ, ऐजूकेशन एंड वूमैन इमपावरमेन्ट ऐवेरनेस (सेवा) जाखन, देहरादून ने साईं स्कूल ऑफ नर्सिंग, राजपुर रोड देहरादून में स्तनपान ओरिएंटेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया।सोसाइटी द्वारा स्तनपान की महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने एवं शिशुओं को कुपोषण से बचाने के लिए इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डाॅ0 सुजाता संजय स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ द्वारा काॅलेज के मेडिकल छात्र-छात्राओं को स्तनपान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां दी। डाॅ0 सुजाता संजय ने बताया मां का दूध बच्चे के लिए अमृत से कम नहीं। यह न सिर्फ शिशु के सर्वांगींण विकास के लिए जरूरी है, बल्कि इससे मां को भी मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य लाभ होता है।

जन्म के शुरूआती एक घंटे में शिशु के लिए मां का दूघ अत्यन्त जरूरी है। इससे पूरी दूनिया में लगभग आठ हजार जिन्दगियां बचती हैं। बावजूद इसके स्तनपान को लेकर अभी भी लोगों में काफी भ्रातियां फैली हुई है। आज भी लोगों में स्तनपान की जरूरतों के प्रति जागरूकता की कमी है। विश्व स्तनपान सप्ताह पर यह विचार माता का शैल्या अस्पताल में आयोजित सेमिनार में बतौर मुख्य मेहमान पहुंची मेडिकल सुपरिटेंडेंट डाॅ सुजाता संजय ने छात्र-छात्राओे से साझा किए। यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के करीब 77 करोड नवजात या हर दो में से एक शिशु को मां का दूध पहले घंटे में नहीं मिल पाता है।

यह आंकडा शिशु मृत्यु दर के लिए बेहद अहम हैं दो से 23 घंटे तक मां का दूध न मिलने से बच्चे के जन्म से 28 दिनों के भीतर मृत्यु दर का आंकडा 40 फीसदी होता है, जबकि 24 घंटे के बाद भी दूध न मिलने से मृत्यु दर का यही आंकडा बढकर 80 प्रतिशत तक हो जाता है। देश में नवजात शिशुओं की मौत की सबसे बडी वजह मां का दूध नहीं पिलाया जाना भी है । इसलिए बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते है। सरकारी आंकडो के अनुसार देश में 5 साल से कम आयु केे 42,5 प्रतिशत बच्चे कुपोषित हैं और 69,5 प्रतिशत बच्चे खून की कमी से जुझ रहे हैं।

दूनिया के 10 अविकसित बच्चों में से चार भारतीय होते है। और पांच साल से कम उम्र के लगभग 15 लाख बच्चे हर साल भारत में अपनी जान गंवाते हैं। डाॅ0 सुजाता संजय ने छात्र-छात्राओं को स्तनपान के महत्व के बारे में बताया कि मातृत्व स्त्री के जीवन की संपूर्णता एवं सार्थकता समझी जाती है। मां का दूध, जिसमें बच्चे को पोषण मिलता है, उसकी बीमारियों से रक्षा होती है। शिशु के लिए माँ का दूध अमृत के समान होता है। माँ के दूध से शिशु कुपोषण के साथ-साथ रोगों से लड़ने की शक्ति भी मिलती है। पहले छः महीने तक बच्चों को केवल स्तनपान पर ही निर्भर रखना चाहिए।

सुपाच्य होने के कारण माँ के दूध से शिशु के जीवन के लिए जरूरी है। इतना ही नहीं स्तनपान सिर्फ आपके शिशु के लिए ही नहीं बल्कि आपके लिए भी फायदेमंद है। स्तनपान कराने वाली महिलाएं रोगमुक्त रहती है। माँ का दूध बच्चे को जीवन में सिर्फ एक बार ही मिलता है। इसे शिशु को जरूर पिलाना चाहिए। माँ के दूध में सभी पोषक तत्व बिल्कुल सही अनुपात में होते हैं, इसका कोई विकल्प हो ही नहीं सकता। गर्भावस्था में माॅओं के शरीर में प्रारंभ में जो दुध बनता है, वह कोलोस्ट्रम कहलाता है। कोलोस्ट्रम ऐसे पोषकों तथा एंटीबाॅडीज़ से समृद्ध होता है, जो शिशु को संक्रमणों तथा अन्य रोगों से रक्षा करता है।

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