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ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल टेस्ट

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल टेस्ट
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पाकिस्तान-चीन से तनाव के बीच भारत ने मंगलवार को अंडमान-निकोबार द्वीप समूह (Andaman and Nicobar Island) क्षेत्र से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (BrahMos supersonic cruise missile) के लैंड अटैक वर्जन का सफल परीक्षण किया है. ब्रह्मोस 21वीं सदी की सबसे खतरनाक मिसाइलों में से एक है. इस हफ्ते ब्रह्मोस मिसाइल के कई ऑपरेशन टेस्‍ट होने हैं. भारत अपनी ताकत को बढ़ाने में जुटा है. भारत लगातार क्रूज और बैलेस्टिक मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है. जिसमें उसे सफलता भी मिल रही है.

इसबार बढ़ा रेंज

ब्रह्मोस मिसाइल को भारत और रूस के रक्षा संस्‍थानों ने मिलकर बनाया है. BrahMos में Brah का मतलब ‘ब्रह्मपुत्र’ और Mos का मतलब ‘मोस्‍कवा’ है. दोनों देशों की एक-एक नदी के नाम को मिलाकर इस मिसाइल को नाम दिया गया है. ब्रह्मोस मिसाइल के कई वैरियंट्स हैं. आज जिसका टेस्ट हुआ वो जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइल है. इसके रेंज को बढ़ाकर अब 400 किलोमीटर किया गया है.



क्या है खासियत

यह ब्रह्मोस मिसाइल की लंबाई 28 फीट है और इसका वजन 3000 किलोग्राम है. इसकी स्पीड सबसे खतरनाक है. यह 4300 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दुश्मनों पर हमला करने में सक्षम है. पलक झपकते ही यह दुश्मनों का काम तमाम कर देती है. यह 200 किलोग्राम के पारंपरिक और परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. साथी ही यह 300 किलोमीटर से 800 किलोमीटर तक की दूरी तक के टार्गेट को मार गिरा सकती है.

इसके अलावा ब्रह्मोस का एक और वर्जन टेस्‍ट हो रहा है, जो 800 किलोमीटर की रेंज में टारगेट को नेस्तनाबूद कर सकता है. ब्रह्मोस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसे कहीं से भी लॉन्‍च किया जा सकता है. पनडुब्‍बी वाली ब्रह्मोस मिसाइल का पहला परीक्षण 2013 में हुआ था. यह पानी में 40 से 50 मीटर की गहराई से छोड़ी जा सकती है. हवा में मिसाइल को छोड़ने के लिए सुखोई-30MKI का खूब इस्‍तेमाल होता रहा है.

सुरक्षा कारणों के चलते सेनाएं यह नहीं बताती हैं कि उनके पास कितनी ब्रह्मोस मिसाइल है. ब्रह्मोस मिसाइल से सबसे पहले भारतीय वायुसेना की स्‍क्‍वाड्रन नंबर 222 (टाइगरशार्क्‍स) को लैस किया गया था. भारतीय आर्मी के पास सैकड़ों ब्रह्मोस मिसाइलें हैं. नौसेना ने भी कई जंगी जहाजों पर इसे तैनात कर रखा है. अभी कई और रेंज में ब्रह्मोस मिसाइलें आएगी. भारत और रूस इसपर लगातार काम कर रहे हैं.




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