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October 16, 2019

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बीकानेर में स्थित करणी माता के मंदिर की जहां पर बीस हजार चूहें रहते हैं

बीकानेर में स्थित करणी माता के मंदिर की जहां पर बीस हजार चूहें रहते हैं
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धर्म एक ऐसी चीज है जिसमें इंसान ईश्वर की भक्ति में तर्क-वितर्क सब परे कर देता है और भगवान भी उसके इस श्रद्धा भाव का पूरा सम्मान करते हैं। एक ऐसे ही अनोखे भगवान और भक्त के रिश्ते की कहानी से आज हम आपको परिचित कराने जा रहे हैं। आप चूहों का जूठा खाना पसंद करेंगे? सुनकर हैरान ना हों क्योंकि भारत में एक ऐसा प्रचलित मंदिर है जहां पर चूहों को प्रसाद का भोग लगता है और उन्हीं का जूठा किया प्रसाद भक्तों में बांटा जाता है। हम बात कर रहे हैं राजस्थान के बीकानेर में स्थित करणी माता के मंदिर की जहां पर बीस हजार चूहें रहते हैं। ये मंदिर बीकानेर से 30 किलोमीटर दूर देशनोक में स्थित है। इसे चूहों वाली माता का मंदिर और चूहों वाला मंदिर भी कहा जाता है।

इन चूहों को यहां पर काबा कहकर बुलाते हैं। हैरान करने वाली बात तो ये है कि इतने चुहे होने के बाद भी मंदिर से ना तो बदबू आती है और ना ही आजतक कोई भी भक्त ये प्रसाद खाकर बीमार हुआ है। माता करणी को दुर्गा का अवतार माना जाता है ऐसी मान्यता है कि गुफा में माता करणी 600 वर्ष पहले अपने इष्ट देव की पूजा किया करती थी। ये गुफा आज भी वहां पर है।

इस मंदिर में चूहों की संख्या इतनी ज्यादा है कि दर्शन करने के लिए आपको अपने पैरों को घसीटते हुए जाना होता है। एक भी चूहे का आपके पैर के नीचे आना बहुत ही अशुभ माना जाता है वहीं अगर कोई चूहा आपके पैर के ऊपर से चला गया तो उससे बहुत ही शुभ माना जाता है। एक खास बात और अगर आपको मंदिर में सफेद चूहा दिख गया तो समझ जाइए कि आपकी मनोकामना पूरी हो गई। इन चूहों को माता करणी की संतान माना जाता है।

चूहों को लेकर दो कहानियां प्रचलित हैं-

मंदिर में रहने वाले चूहे माता की संतान माने जाते हैं कथा के अनुसार करणी माता का सौतेला पुत्र लक्ष्मण कोलायत में स्थित कपिल सरोवर में पानी पीने की कोशिश में डूब गया। जब करणी माता को यह पता चला तो उन्होंनें यमराज से उन्हें जीवित करने की प्रार्थना की। पहले तो यमराज ने असमर्थता प्रकट की लेकिन फिर विवश होकर चूहे के रुप में पुनर्जीवित कर दिया।

वहीं बीकानेर के लोकगीतों को देखा जाए तो चूहों की एक अलग ही कहानी मालूम होती है। इन गीतों के अनुसार एक बार 20 हजार सैनिकों की सेना ने देशनोक पर आक्रमण कर दिया, माता ने अपने प्रताप से पूरी सेना को चूहे बनाकर अपनी सेवा में रख लिया।

इस मंदिर का निर्माण 20 वीं शताब्दी में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था। इस मंदिर के दरवाजे चांदी से बने हैं इतना ही नहीं चूहों के खाने के लिए जो थाली रखी है वो भी चांदी की है, माता का छत्र सोने का है। माता को भोग लगाने के बाद प्रसाद पहले चूहों को दिया जाता है उसके बाद उसे भक्तों में बांटा जाता है। एक और हैरान करने वाली बात तो इस मंदिर के बारे में है वो ये कि एक भी चूहा मंदिर के बाहर कभी नहीं दिखता। अगर आपकी यहां जाने की योजना हो तो नवरात्रों में जाए क्योंकि उस दौरान यहां पर विशेष मेला लगता है और ऐसा दोनों की नवरात्रों में होता है।

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