August 05, 2021

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यॉर्कर गेंद के लिए बांस का बल्ला बेहतर, क्या ICC से मिलेगी इजाजत

यॉर्कर गेंद के लिए बांस का बल्ला बेहतर, क्या ICC से मिलेगी इजाजत

क्रिकेट के खेल में कोई बल्लेबाज अगर बेहतरीन प्रदर्शन करता है तो इसका श्रेय न सिर्फ उस खिलाड़ी के हुनर को जाता है, बल्कि इस बात पर गौर करना जरूरी होता है वो कितने शानदार बल्ले का इस्तेमाल कर रहा है. क्या आपको पता है कि इंटरनेशनल लेवल पर जिस तरह के बैट का इस्तेमाल किया जाता है.

‘बांस का बल्ला होगा कम खर्चीला’

क्रिकेट में कश्मीर या इंग्लिश विलो (खास तरह के पेड़ की लकड़ी) के बैट का इस्तेमाल होता है लेकिन इंग्लैंड के कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी  के एक रिसर्च में पता चला है कि बांस के बने बल्ले  का इस्तेमाल कम खर्चीला होगा और उसका ‘स्वीट स्पॉट’ भी बड़ा होगा. बल्ले में स्वीट स्पॉट बीच के हिस्से से थोड़ा नीचे लेकिन सबसे नीचले हिस्से से ऊपर होता है और यहां से लगाया गया शॉट दमदार होता है.

‘यॉर्कर गेंद के लिए बांस का बल्ला बेहतर’

इस रिसर्च को दर्शील शाह और बेन टिंकलेर डेविस ने किया है. शाह ने ‘द टाइम्स’ से कहा, ‘एक बांस के बल्ले से यॉर्कर गेंद पर चौका मारना आसान होता है क्योंकि इसका स्वीट स्पॉट बड़ा होता है. यॉर्कर पर ही नहीं बल्कि हर तरह के शॉट के लिए यह बेहतर है.’

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‘बांस ज्यादा उपलब्ध है’

गार्जियन न्यूजपेपर के मुताबिक, ‘इंग्लिश विलो की आपूर्ति के साथ समस्या है. इस पेड़ को तैयार होने में लगभग 15 साल लगते हैं और बल्ला बनाते समय 15 फीसदी से 30 फीसदी लकड़ी बर्बाद हो जाती है.’ शाह का मानना है कि बांस सस्ता है और काफी मात्रा में उपलब्ध है. यह तेजी से बढ़ता है और टिकाऊ भी है. बांस को उसकी टहनियों से उगाया जा सकता है और उसे पूरी तरह तैयार होने में 7 साल लगते हैं.

कैस बनेगा बांस का बल्ला?

उन्होंने कहा, ‘बांस चीन, जापान, दक्षिण अमेरिका जैसे देशों में भी काफी मात्रा में पाया जाता है जहां क्रिकेट अब लोकप्रिय हो रहा.’ इस स्टडी को ‘स्पोर्ट्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी’ मैगजीन में प्रकाशित किया गया है. शाह और डेविस की जोड़ी ने खुलासा किया कि उनके पास इस तरह के बल्ले का प्रोटोटाईप है जिसे बांस की लकड़ी को परत दर परत चिपकाकर बनाया गया है.
दोनों बैट में क्या फर्क है?

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शोधकर्ताओं के मुताबिक, बांस से बना बल्ला ‘विलो से बने बल्ले की तुलना में ज्यादा सख्त और मजबूत’ था, हालांकि इसके टूटने की संभावना ज्यादा है. इसमें भी विलो बल्ले की तरह कंपन होता है. शाह ने कहा, ‘यह विलो के बल्ले की तुलना में भारी है और हम इसमें कुछ और बदलाव करना चाहते हैं.’बांस के बल्ले का स्वीट स्पॉट ज्यादा बड़ा होता है, जो बल्ले के निचले हिस्से तक रहता है.’

क्या ICC से मिलेगी इजाजत?

आईसीसी के नियमों के मुताबिक हालांकि फिलहाल इंटरनेशनल क्रिकेट  में सिर्फ लकड़ी  के बल्ले के इस्तेमाल की इजाजत है, लेकिन देखना होगा कि भविष्य में क्या बांस के बल्ले की इजाजत मिल सकती है या नहीं.

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