भ्यास कथा और अन्य कहानियां By Anil Karki | Doonited.India

November 22, 2019

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भ्यास कथा और अन्य कहानियां By Anil Karki

भ्यास कथा और अन्य कहानियां By  Anil Karki
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मेशा धीर-गंभीर रहने वाला अनिल (Anil Karki), एक दिन बड़े उत्साह से बताने लगा कि दाज्यू किताब छ्पने वाली है….उसके लिखे का तो मैं कायल था ही, एक ही तरफ का होने की वजह से स्नेह और बढ़ गया था, नैट पर मैं उदास बखत का रमोलिया, आपदा का हैलीकाप्टर, नया मुंशी पढ़ चुका था, इन सभी को पढने के बार मैने महसूस किया कि इस लड़के में पहाड़ की सौंधी खुश्बू है, मुझे वही खुशबू फिर से महसूस हुई, जो रसूल हमजातोव और गिर्दा को पढ-सुन महसूस होती थी…हालांकि अभी से इन लोगों से तुलना ठीक नहीं, लेकिन यह भी सच है कि यह उन जैसा नहीं तो उस लाईन का जरुर है, सधते-सधते उन जैसा एक दिन जरुर बन जायेगा, मुझे लगता है। मैं हमेशा कहता हूं कि पहाड़ देखने की चीज नहीं है, जानने और समझने की चीज है, इसने कहा दाज्यू पहाड़ तो जीने की चीज है, वाकई पहाड़ जीने की चीज है, मैने भी आत्मसात किया।

होते-करते इसकी किताब छपी…शीर्षक सुनकर लगा कि यह हमारी ही कहानियां होंगी….”भ्यास कथा और अन्य कहानियां”, इन कहानियों ने पहाड़ की कुरीतियों पर ऐसा प्रहार किया है कि पहाड़ इसे समझे तो कल से फिर से खड़ा हो जायेगा, चाहे अनियोजित खनिज के दोहन से अपनी जमीनों पर ही मुंशी बनते लड़कों पर कटाक्ष करती नया मुंशी हो या जातिवाद पर चोट करती जशोद खर्याल का मुर्गा हो या फिर शहरी बच्चों और हम पहाड़ी भुस्सों का तुलनात्मक अध्ययन करती कहानी रमुवा हो या फिर आपदा को व्यापार बनाये हम लोगों के कारोबार पर चोट करती, आपदा का हैलीकाप्टर हो…सब कहानियां दिल को झकझोर जाती हैं और सबसे बड़ी बात कि यह सब कहानियां हमें आत्मावलोकन करने को मजबूर कर देती हैं।

कहानियों के हिसाब से डाले गये ठेठ पहाड़ी शब्द, जो अब बोलचाल से बाहर हो गये हों या छोटे-छोटे जोड़ और गीत कहानियों में रोचकता पैदा ही नहीं करते बल्कि कहीं-कहीं पर तो काणे बुकोर देते हैं, धन्यवाद Anil Karki भाया, हमें हमारे ही पहाड़ से परिचित कराने के लिये और शुभकामनायें जागर लगाते रहने के लिये, तुम्हारे तेवर यों ही तीखे रहें, पहाड़ की जो समझ तुम्हें है, उससे दुनिया को भी परिचित कराते रहो, जिस आग में तुम जल रहे हो, उससे हमको भी झुलसाते रहो।


By: पंकज सिंह महर

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