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ऐल्कलाइन – जानें इसके फ़ायदे

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क्या है ऐल्कलाइन डायट? जानें इसके फ़ायदे

आमतौर पर ‘द बॉडी’ के नाम से जानी जानेवाली सुपरमॉडल मैक्फ़र्सन उम्र के 52वें वर्ष में अपने आकर्षक लुक का श्रेय ऐल्कलाइन बॉडी बनाए रखने को देती हैं. वे इस जीवनशैली की इस क़दर मुरीद हैं कि पीएच बैलेंस यूरीन-टेस्टर किट हमेशा साथ रखती हैं, ताकि वे अपना ऐल्कलाइन स्तर जांच सकें. देखा जाए तो यह हॉलिवुड के लिहाज़ से भी पागलपन है. लेकिन वे अकेली नहीं हैं; ग्वेनेथ पैल्ट्रो, जेनिफ़र एनिस्टन और विक्टोरिया बेखम का भी इस पर विश्वास है.
कॉस्मेटिक फ़िजिशन और लेखिका डॉ जमुना पई कहती हैं इस ट्रेंड का आधार सदियों पुराने भारतीय ज्ञान में निहित है. ‘‘दांतों को नीम के पेड़ की लकड़ी यानी दातुन से साफ़ करना पुराना चलन है. दातुन में ऐंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं और यह न केवल मुंह को साफ़-सुथरा रखता है, बल्कि आंत की सफ़ाई करने में भी मदद करता है. दांत साफ़ करने के बाद लोग पीले रंग के द्रव यानी एसिडिक प्रणाली को दर्शानेवाले पित्त या बाइल को निकालने के लिए कुल्ला करते थे. वे तब तक कुल्ला करते थे, जब तक कि पानी का रंग क़रीब-क़रीब सफ़ेद न हो जाए. ये आंत के साफ़ होने और आदर्श एसिड-ऐल्कलाइन संतुलन का संकेत हुआ करता था.’’

पीएच को जानें
डॉ देबजानी बैनर्जी, इन-चार्ज डाइटेटिक्स, पीएसआरआई हॉस्पिटल, नई दिल्ली, हमें इसका अनुपात बता रही हैं,‘‘पीएच हमारे शरीर के फ़्लूइड्स और टिशूज़ का एसिड-ऐल्कलाइन अनुपात है. जब ये अनुपात बिगड़ जाता है-यानी शरीर या तो बहुत एसिडिक हो जाता है या फिर ऐल्कलाइन-यह स्थिति कई तरह की बीमारियों को न्यौता देती है, जैसे-उम्र का तेज़ी से बढ़ना, डीमिनरलाइजेशन, थकान, एन्ज़ाइम की बिगड़ी हुई गतिविधि, सूजन और शरीर के अंगों की क्षति.’’
एसिडिटी या ऐल्कलाइनिटी को पीएच स्केल पर (पीएच यानी पोटैंशियल ऑफ़ हाइड्रोजन. इसमें हाइड्रोजन आयन की सांद्रता मापी जाती है) 1 से लेकर 14 तक के स्तर पर मापा जाता है. 7 से कम पीएच का मतलब है कि आपका शरीर एसिडिक है. 7 से ज़्यादा पीएच यानी आपका शरीर ऐल्कलाइन है. यदि पीएच स्केल पर आपका माप 7.1 से 7.4 के बीच है तो आपका शरीर बिल्कुल उपयुक्त जगह पर है: एसिडिक से थोड़ा ज़्यादा ऐल्कलाइन. ‘‘इस स्तर पर आपका शरीर ऐंटीऑक्सीडेंट्स, ऐंटी-एजिंग फ़ायटोन्यूट्रिएंट्स, एसेंशियल मिनरल्स और विटामिन्स से भरा होता है. ये सभी आपको जवां और सेहतमंद बनाए रखते हैं,’’ बताती हैं डॉ पई.

कैसे जांचें अपने शरीर का पीएच स्तर?
यदि आप अपना एसिड-ऐल्कलाइन स्तर जांचना चाहती हैं तो नज़दीकी मेडिकल स्टोर में जाएं और पीएच टेस्ट स्ट्रिप्स का पैक ख़रीदें. इसे अपने सलाइवा या यूरीन में डूबोएं. ‘‘आप पूरे दिन कई बार अपना पीएच स्तर जांच सकती हैं, लेकिन इसे जांचने का सबसे सही समय है प्रतिदिन सुबह तय व़क्त पर जांचना. आपका ध्येय सुबह के पीएच स्तर को 6.5 से 7.5 के बीच लाना होना चाहिए,’’ बताती हैं डॉ बैनर्जी. सुबह सबसे पहले जांचें या फिर खाने-पीने के एक घंटे पहले या भोजन के दो घंटे बाद जांचें.

क्या है एसिड-ऐल्कली थीअरी?
मुख्य रूप से ऐल्कलाइन डायट बीमारी के एसिड/ऐल्कली थीअरी पर आधारित होता है. ‘‘जब खाए गए भोजन का विघटन होता है तो हमारे शरीर में भोजन के एसिडिक तत्वों से कुछ ग़ैरज़रूरी प्रॉडक्ट्स बनते हैं, जिन्हें भस्म कहा जाता है. ऐल्कलाइन डायट के समर्थकों का मानना है कि एसिडिक भस्म की अधिक मात्रा बीमारियों को आमंत्रित करती है,’’ जोड़ती हैं डॉ बैनर्जी. एसिडॉसिस तब होता है, जब शरीर टॉक्सिन्स को नहीं निकाल पाता, जिसकी वजह से गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा हो जाती हैं. न्यूट्रिशनिस्ट कंचन पटवर्धन बताती हैं,‘‘एसिड की मात्रा अधिक होने की स्थिति में शरीर हड्डियों से कैल्शियम और मैग्नीशियम अवशोषित कर संतुलन बनाने की कोशिश करता है. यह ऑस्टिओपरोसिस की संभावना को बढ़ाता है और त्वचा को पीला, बालों को रूखा और नाख़ूनों को नाज़ुक बनाता है.’’



पर क्या पीएच डायट में भी झोल है?
हालांकि हर डायट की तरह इसके भी अपने समर्थक हैं, लेकिन यह पूरी तरह विश्वसनीय नहीं है. विशेषज्ञ भी इस दिशा में ध्यान से क़दम बढ़ाने की सलाह देते हैं. यहां पीएच डायट को ख़ारिज करनेवाले भी हैं, जिनका मानना है, शरीर की संरचना कुछ इस तरह हुई है कि बग़ैर हमारी दख़लअंदाज़ी के वह अपना संतुलन ख़ुद बनाए रख सकता है. इसके अलावा यह पता करना कि कौन-सा भोजन एसिडिक है और कौन-सा ऐल्कलाइन बेहद पेचीदा है. उदाहरण के लिए नींबू का गुण एसिडिक है, लेकिन खाने के बाद शरीर द्वारा पचाए जाने पर ऐल्कलाइन हो जाता है. एक और समस्या है कि ज़रूरत से ज़्यादा सेवन हमें अधिक ऐल्कलाइन बना सकता है. यह आपके पीएच स्तर को ७.५० से ऊपर पहुंचा सकता है, जिससे ऐल्कलॉसिस हो सकता है. इससे न्यूरोलॉजिकल हाइपरसेन्सिटिविटी हो सकती है, जिससे चिड़चिड़ापन, बेचैनी और मांसपेशियों में ऐंठन आने की संभावना बढ़ सकती है.
किसी भी चीज़ को सीमित रूप में करना ही सबसे बेहतर तरीक़ा है. डॉ बैनर्जी बताती हैं,‘‘पीएच स्तर को ऐल्कलाइन करने के लिए ज़रूरी नहीं कि आप हमेशा ऐल्कलाइन भोजन ही करें; डायट का कुछ प्रतिशत एसिडिक भी हो सकता है, लेकिन सबसे सही होगा न्यूट्रल संपूर्ण आहार, जैसे-फलों का सेवन करना. इस बात को लेकर काफ़ी विवाद है कि क्या वास्तव में भोजन रक्त के पीएच स्तर को बदल सकता है और शरीर की कुछ बीमारियों से लड़ने की क्षमता में बदलाव ला सकता है. अंतत: (इस डायट की क्षमता) अच्छा खाना और असेहतमंद आहार को अपनी डायट से दूर करना ही महत्वपूर्ण है.’’
सामान्यत: कोई भी डायट जो फलों, सब्ज़ियों और पौधों से मिलनेवाले आहार को खानपान में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करती है, एक बेहतरीन विकल्प है. एसिड-ऐल्कलाइन विवाद का एक मक़सद यह जांचना होता है कि आप क्या खा रही हैं और ये किस तरह आपकी पूरी सेहत को प्रभावित करता है. शुरुआत करने में अब भी देर नहीं हुई है.

 

कैसा हो हमारा सही खानपान?
ऐल्कलाइन बनानेवाले आहार शरीर के डीटॉक्सिफ़िकेशन प्रणाली के दबाव को कम करते हुए हमारी सेहत में सुधार लाते हैं. डॉ पई का मानना है कि अपने सिस्टम को ऐल्कलाइन करके आप कैंसर जैसी बीमारियों के प्रसार को रोक सकती हैं और बढ़ती उम्र से लड़ने की अपनी क्षमता को बढ़ा सकती हैं. इसके लिए फलों, सब्ज़ियों और पौधों से मिलनेवाले आहार खाने और ढेर सारा पानी पीने की ज़रूरत है. चिंता, स्मोकिंग, कैफ़ीन, शुगर, मैदा और गोश्त न खाएं. ‘‘ताज़े हरी सब्ज़ियों के जूस में क्लोरोफ़िल, ऐंटीऑक्सीडेंट्स और पोषक तत्वों की मात्रा अधिक होती है,’’ बताते हैं होलिस्टिक हेल्थ एक्स्पर्ट मिकी मेहता. पूरी तरह से अपनी  डायट को बदलना, न केवल मुश्क़िल है, बल्कि विपरीत परिणाम भी दे सकता है, यह बताते हुए डॉ पई धीरे-धीरे बदलाव करने की सलाह देती हैं. शुरुआत के लिए:

* तले भोजन के बजाय ग्रिल्ड, उबला, भाप में पका या बेक किया हुआ भोजन चुनें.
* डेयरी प्रॉडक्ट्स का सेवन कम करें. दूध एसिड बनाता है इसलिए इसे सब्ज़ियों जैसे ऐल्कलाइन फ़ूड्स खाकर संतुलित करने की ज़रूरत है.
* प्रोसेस्ड और रेड मीट्स से बचें.
* ख़राब फ़ैट्स से दूर रहें, जैसे-ट्रैंस, हाइड्रोजनेटेड और सैचुरेटेड फ़ैट्स और मोनोसैचुरेटेड व ओमेगा-3, ओमेगा-6 फ़ैट्स का सेवन करें. ये अखरोट व बादाम जैसे नट्स से मिलते हैं और कॉर्न, ऑलिव और सऩफ्लावर तेल में पाए जाते हैं.
* प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फ़ूड्स और प्रिज़र्वेटिव्स व ऐडिटिव्स के साथ पैक किए गए भोजन से बचें.
* अल्कोहल के सेवन पर लगाम कसें. इसमें वाइन भी शामिल है.
* रंगीन फलों और सब्ज़ियों, जैसे-बेरीज़, आम, पपीता, गाजर, कद्दू, टमाटर, पालक, ब्रोकलि, नींबू, रतालू, बीट रूट और वीटग्रास के रूप में ऐंटीऑक्सीडेंट्स का सेवन बढ़ाएं. ढेर सारा वेजेटेबल सूप पीएं.

‘‘यह डायट हमारे उष्ण, ट्रॉपिकल मौसम के उपयुक्त है,’’ बताती हैं ध्वनि शाह, हीलिंग डायट्स विशेषज्ञ, द एफ़आईएमएस डायट क्लीनिक. ‘‘हालांकि ये हमारे पारंपरिक भोजन से थोड़ा अलग है, जो कि बड़े पैमाने पर अनाज पर आधारित है. फलों और सब्ज़ियों की उपलब्धता से यह काफ़ी आसान बन सकता है. आपको जूस और सलाद बनाने की आदत डालनी होगी.’’ इस डायट के दौरान ध्वनि कार्डियो करने की सलाह देती हैं, जो ऑक्सिजन बनाता है और भोजन के ऐल्कलाइन प्रभाव को बढ़ाने में मदद करता है. योग, मेडिटेशन और आउटडोर एक्सरसाइज़ अच्छा परिणाम देंगे.



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