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February 17, 2019

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मंझली भाभी

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मंझली भाभी


आज मनुआ को देखने और उसके परिवार से मिलने लड़की वाले पटना के मौर्या होटल में आने वाले थे ।मनुआ ने फ़ोन पर भइया और मंझली भाभी को अच्छे से सारी तैयारी कर लेने के लिए बोला था।इंजीनियरिंग करने के बाद मनु दिल्ली के बडी कंपनी में एक साल से नौकरी कर रहा था ।इधर मंझली भाभी और भइया बड़े चिंता में थे क्योंकि भाभी के पास एक अच्छी सी साड़ी और भइया के पास अच्छा से कुर्ता तक न था।

सात साल पहले मंझली भाभी छोटे घर से बेरोजगार मंझले भइया से व्याह कर आईं थीं।।बड़े भइया को डॉक्टरी पढ़ाने में पिताजी की छोटी से जमा पूंजी भी ख़त्म हो गयी थी और डॉक्टर बनने के बाद बड़े भइया एक डॉक्टरनी से खुद शादी कर लिए। बड़की भाभी ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवार देख सबसे उनका रिश्ता नाता भी तोड़वा दिया था।
फिर मंझले भइया किसी तरह परीक्षा पास कर बड़ा बाबू हो गए । माँ बाप को गाँव मे रखकर पटना में एक कमरे का छोटा सा घर किराए पर लेकर छोटे भाई मनुआ को पढ़ाने लगे।मनुआ को कंप्यूटर इंजीनियर बनने का बड़ा शौक था।

ऊपरी आमदनी कुछ थी नहीं।पटना जैसे महँगे शहर में रहने छोटे भाई मनुआ को कॉलेज और ट्यूशन का पैसा वहन करने और माँ बाप को भी कुछ पैसे भेजने के बाद गृहस्थी की गाड़ी बड़ी मुश्किल से चल रही थी।उनका तीन साल का एक छोटा सा बच्चा भी था।

फिर भी मंझले भईया ने कभी भी उफ्फ तक नहीं की। मंझली भाभी ने तो जैसे अपने शौक को बलिदान कर दिया था मनुआ की पढ़ाई की खातिर घूमना फिरना और जेवर सोना तो दूर की बात, आज तक एक नई साड़ी तक कि जिद न की।पढ़ने के लिए घर मे जो एक ही कमरा था वो भी दे देतीं और बच्चे से पढ़ाई में कोई बाधा न हो बच्चे को लेकर पड़ोस में चली जाती।खुद और भइया तो कम दूध वाली फीकी चाय पीते ही अपने बच्चे को भी थोड़ा दूध कम देतीं लेकिन मनुआ को खाने पीने में कोई कमी न होने देतीं।

मनुआ के बहुत अच्छे रिजल्ट के बाद एक सप्ताह के भीतर इंजिनीरिंग कॉलेज में नामांकन के लिए पचास हजार रुपये की जरूरत थी कोई उपाय न सूझ रहा था।अंत में बड़े भाई को फ़ोन लगाया गया पर पैसे की कोई कमी ना होने के बाद भी बडी भाभी ने पैसे की कमी का रोना शुरू कर दिया।

अब कल ही नामांकन का आखिरी दिन था ।उसी वक़्त मंझली भाभी ने अपना मंगलसूत्र और शरीर के सारे गहने उतारकर भइया के हाथ में रख दीं और कसम दे दी थी।इसके बाद भी पढ़ाई पूरी होने तक मनुआ की सारी जिम्मेवारियों को मंझले भाई और भाभी ने उठाया।

बर्षों बाद आज मंझली भाभी और भइया मनुआ के रिश्ते के लिए आए लड़की वालों से इतने बड़े होटल में कैसे और किस हाल मिलेंगे ये सोच ही रहे थे कि अचानक से मनुआ हाथ में कई पैकेट्स लिए आ गया।

सबसे पहले भाई के पैर छूते हुए एक सूट पैंट निकाला और बोला “जरा पहन कर दिखाइये भइया” फिर भतीजे का सुंदर सा ड्रेस दिया और बोला” तुम्हारी पढ़ाई की सारी जिम्मेवारी मेरी अब तुम मेरे साथ रहकर पढ़ाई करोगे और छुट्टीयो में हम सब एक साथ रहकर खूब मस्ती करेंगे” ये सुनकर वो खुशी से नाचने लगा फिर अंत में मंझली भाभी के छुड़ाकर लाये पुराने गहनों के अलावा कई नए गहने और साड़ियां देकर पैरों में गिरकर बोला ” ना मत कहना मंझली भाभी मुझे नही पता देवी कैसी होती है पर वो आपके जैसी ही होती होगी मंझली भाभी……”

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Sanjeev Kumar

 

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