Breaking News

दो सुल्तान, दो बादशाह और उनका प्रणय-परिवेश

पुस्तक समीक्षा: दो सुल्तान, दो बादशाह और उनका प्रणय-परिवेश

लेखक: हेरम्ब चतुर्वेदी

मूल्य: रु. 200 (पेपर बैक) 
वाणी प्रकाशन


मुग़ल बादशाहों में सबसे कट्टर और सख़्त माना जानेवाला औरंगज़ेब क्या एक प्रेमी भी हो सकता था? दिल्ली के सुल्तान जलालुद्दीन खलजी का सगा भतीजा और उसकी बड़ी बेटी का पति अलाउद्दीन आख़िर किन कारणों के चलते ख़ुद पर अदम्य विश्वास करनेवाले चाचा की हत्या करता है? दिल्ली के तख़्त पर आसीन होने की उसकी महत्वाकांक्षाओं को पंख किसने दिए थे? एक समय समलैंगिक आकर्षण के चलते कटु वैवाहिक संबंध और तलाक़ की पीड़ा झेल चुके बाबर को मानसिक स्थायित्व किस रिश्ते के चलते मिला? मुग़ल सत्ता के भारत से पैर उखाड़ने और दिल्ली में दोबारा अफ़गान हुकूमत स्थापित करने में शेरशाह सूरी के विभिन्न विवाहों की क्या भूमिका रही? इन सभी सवालों के जवाब से भरे हैं इतिहास के प्रोफ़ेसर और साहित्य में गहरी रुचि रखनेवाले हेरम्ब चतुर्वेदी की किताब दो सुल्तान, दो बादशाह और उनके प्रणय-परिवेश के पन्ने. 
यह पुस्तक मध्यकालीन भारतीय राजनीति की उठा-पटक को बयां करती है. सत्ता-संघर्ष के षड्यंत्रों के बारे में तफ़सील से बताती है. दिल्ली के तख़्त पर क़ाबिज होने के लिए किसने कितना लहू बहाया, किस तरह की संधिया की गईं? लेखक ये तमाम बातें अपने-अपने दौर के चार मशहूर शासकों के प्रणय-परिवेश को केंद्र में रखकर बताते हैं.
सबसे अधिक चौंकाता है मयूर सिंहासन पर बैठनेवाला छठा मुग़ल शासक औरंगज़ेब. पिता, बड़ी बहन जहांआरा और तख़्त के घोषित वारिस दारा शिकोह की उपेक्षा से निराश हो चुके औरंगज़ेब को अधेड़ उम्र में प्यार होता है ज़ैनाबादी नामक एक नवयौवना से, जो उसे निराशा की गर्त से बाहर लाती है और बादशाह बनने के लिए प्रेरित करती है. उसका दिल दूसरी बार धड़कता है दारा शिकोह की विधवा उप-पत्नी राना-ए-दिल के लिए. राना उसके प्रेम निवेदन को दो बार अस्वीकार कर देती है, पर वह उसके साथ ज़बर्दस्ती नहीं करता. उसके फ़ैसले का आजीवन सम्मान करता है.
पुस्तक में जानकारियों की कोई कमी नहीं है, लेकिन प्रस्तुतिकरण इसकी कमज़ोर कड़ी जान पड़ती है. कई जगह एक ही बात को अलग-अलग शब्दों में दोहराया गया है, जो पाठकों को अरुचिकर लग सकता है. टाइट एडिटिंग द्वारा इसके पन्नों को कम करते हुए कहानियों को और रोचक बनाया जा सकता था. इस कमी के बावजूद इन चारों शख़्सियतों के भावुक पक्ष को समझने के लिए यह पुस्तक पढ़ी जानी चाहिए.



Post source : वाणी प्रकाशन

Related posts

Leave a Reply

%d bloggers like this: