November 29, 2021

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क्या थी वो बीमारी जिससे जंग हार गए हैंडसम हीरो विनोद खन्ना, 7 साल तक सहा था दर्द, जानिए लक्षण और बचाव

क्या थी वो बीमारी जिससे जंग हार गए हैंडसम हीरो विनोद खन्ना, 7 साल तक सहा था दर्द, जानिए लक्षण और बचाव


भूपेंद्र राय- Symptoms and treatment of bladder cancer: साल 1968 में आई फिल्म ‘मन का मीत’से सिल्वर स्क्रीन पर एक ऐसे विलेन ने कदम रखा. जिसकी हरकतें तो विलेन वाली थीं, लेकिन दिखता एकदम हीरो जैसा था. नाम था विनोद खन्ना. सुनील दत्त साहब ने यह फिल्म अपने भाई को लांच करने के लिए बनाई थी, लेकिन फिल्म रिलीज के बाद विलेन बने विनोद खन्ना की गाड़ी चल पड़ी. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. बतौर विलेन फिल्मी सफर शुरू करने वाला ये एक्टर बहुत की समय में एक हीरो के रूप में लाखों की दिलों की धड़कन बन गया. 

‘मेरे अपने’, ‘कुर्बानी’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रेशमा और शेरा’, ‘हाथ की सफाई’, ‘हेरा फेरी’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’ दयावान, ‘अमर अकबर एंथनी’, ‘चांदनी’, ‘जुर्म’ जैसी कई शानदार फिल्मों में इस हैंडसम हीरो ने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया.  विनोद खन्ना एक ऐसे सितारे रहे, जिनका कोई फैमिली बैकग्राउंड नहीं था, लेकिन फिर भी उनके अभिनय को देख ऐसा लगता था, जैसे उन्हें यह कला बचपन से मिली है. हालांकि अब विनोद खन्ना अब हमारे बीच नहीं हैं.  

27 अप्रैल, 2017 को विनोद खन्ना ने इस दुनिया से अलविदा कह दिया था. उनकी मौत ब्लैडर कैंसर के कारण हुई थी. खबरों के मुताबिक वे पिछले सात सालों से इस बीमारी से झूझ रहे थे, लेकिन इससे बच नहीं सके. इस खबर में हम जानेंगे कि ब्लैडर कैंसर क्‍या होता है, इसके लक्षण क्या हैं और कौन इसकी जद में आ सकता है….

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क्या है ब्लैडर कैंसर (what is bladder cancer)
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के अनुसार, ब्लैडर हमारे शरीर का वो हिस्सा होता है, जहां गुर्दों से दो नलियां उतरकर एक थैली में आती हैं, इस हिस्से में जो भी कैंसर होता है, उसे हम ब्लैडर कैंसर कहते हैं. यह पुरुषों में छठा सबसे अधिक होने वाला कैंसर है. अगर सही समय पर इसका इलाज नहीं किया गया तो इंसान की मौत तक हो जाती है. 

ब्लै‍डर कैंसर के लक्षण (symptoms of bladder cancer)

  1. शौच या पेशाब में खून का आना.
  2. पेशाब करने के दौरान दर्द का होना.
  3. कभी-कभी पेट के निचले हिस्से में दर्द का होना.
  4. पीरियड्स के वक्त अधिक खून का आना.
  5. कभी-कभी यूरिन में जलन और यूरिन का रुकना.

इन लोगों को रहता है ज्यादा खतरा

  • बहुत ज्यादा स्मो‍क करने वाले लोग
  • कपड़े रंगने का काम करने वाले लोगों को बहुत रिस्क
  • 60 से 70 साल की उम्र के लोगों को अधिक रिस्क

ब्लैडर कैंसर का कारण  (cause of bladder cancer)
मायउपचार के अनुसार, ये कैंसर किसी को भी हो सकता है, लेकिन जो लोग ज्यादा धूम्रपान करते हैं या फिर रसायनों के संपर्क में रहते हैं वे इस कैंसर की जद में जल्दी आ सकते हैं. ज्यादातर मामलों में ब्लैडर कैंसर बुढ़ापे में ही होता है.

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ब्लैडर कैंसर के स्टेज (bladder cancer stage)

  • स्टेज1– इस स्टेज में कैंसर ब्लैडर की आंतरिक परत में होता है.
  • स्टेज 2– इस स्टेज में कैंसर ब्लैडर पर अटैक करता है, जो सिर्फ ब्लैडर तक ही सीमित रहता है.
  • स्टेज 3- इस स्टेज में कैंसर की कोशिकाएं ब्लैडर के ऊतकों से आसपास के ऊतकों तक फैल जाती हैं
  • स्टेज 4- इस स्टेज में कैंसर कोशिकाएं लिम्फनोड्स और दूसरे अंगों तक फैल जाती हैं, जैसे कि हड्‌डियां, लीवर या फेफड़े जैसे आंतरिक अंग.

ब्लैडर कैंसर से कैसे बचा जा सकता है?

  1. हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि  अगर आप धूम्रपान करते हैं तो उसे तुरंत छोड़ दें. 
  2. इसके अलावा अपने कार्यस्थल पर खतरनाक केमिकल के संपर्क में आने से बचें
  3. अगर आपके काम में केमिकल का प्रयोग शामिल है, तो सुनिश्चित करें कि आप अपने आप को सुरक्षित रख रहे हैं.
  4. खूब मात्रा में तरल पदार्थ पीयें, क्योंकि तरल पदार्थ कैंसर का कारण बनने वाले शरीर के अंदर मौजूद तत्वों  को पतला कर देते हैं और उनके हानि पहुंचाने से पहले उनको पेशाब के साथ शरीर से बाहर कर देते हैं

ब्लैडर कैंसर का इलाज (bladder cancer treatment)
ब्लैडर कैंसर के इलाज में सबसे यह सुनिश्चित किया जाता है कि कैंसर शरीर के और भागों में फैला न हो. यदि कैंसर अन्य जगहों पर फैल गया है तो हमें उसकी स्टेजिंग के आधार पर इलाज शुरू किया जाता है.  ब्लैडर के कैंसर दो तरीके से वर्गीकृत किए हैं, एक नॉन मसल इनवेसिव ब्लैडर कैंसर और मसल इनवेसिव ब्लैडर कैंसर. 

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1. नॉन मसल इनवेसिव ब्लैडर कैंसर के बारे में अगर बात करें तो इसमें ब्लैडर के अंदर एंडोस्कोपी रिसेक्शन किया जाता है, जिसे हम टीयूआर बीडी कहते हैं. उसके बाद ब्लैडर में दवा डाली जाती है और हर तीन महीने में सिस्टोस्कॉपी की जाती है.

2. मसल इनवेसिव ब्लैडर कैंसर काफी घातक होता है. इस प्रक्रिया में ब्लैडर को सर्जरी की मदद से निकालना पड़ता है. रेडिकल सिस्टेक्टोमी करने के बाद पहले या बाद में कीमोथेरेपी की जा सकती है. इसके बाद यूरिन से बाहर निकालने के लिए एक रास्ता बनाया जाता है.

3. इसके साथ ही कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी का उपयोग भी इसमें किया जाता है. इसके उपचार में रोबोटिक सर्जरी का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है.

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यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.​



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