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कल्पनाओं के रंग, माटी, लोकजीवन और लोकसंस्कृति को दिलाई याद: Saru Dabral (सरू डबराल)

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सरू डबराल!— कैनबास पर उकेरे कल्पनाओं के रंग, पेंटिंग्स के जरिए पहाड़, माटी, लोकजीवन और लोकसंस्कृति को दिलाई नयी पहचान!

लीजिए आज ग्राउंड जीरो से आपको उत्तराखंड की एक ऐसी प्रतिभा से रूबरू करवाते हैं जिन्होंने अपनी बेहतरीन पेंटिंग्स के जरिए अपने पहाड, अपनी माटी, और लोकसंस्कृति को नयी पहचान दिलाई है। जिनका नाम है सरोजनी डबराल जो लोगों के बीच सरू डबराल के नाम से प्रसिद्ध है।

Click the presentation and enjoy few creatives of Saru Dabral

 

गौरतलब है कि सरू डबराल मूल रूप से टिहरी जनपद के चमरोली गांव की रहने वाली है। अपने परिवार के साथ सरू डबराल टिहरी, देहरादून और दिल्ली में रही। दिल्ली में पली बढ़ी सरू नें कभी भी अपने उत्तराखंड को नहीं बिसराया। सरू नें अपने करियर की शुरुआत दिल्ली में फैशन डिजाइनर के तौर पर की थी लेकिन बचपन से ही पेंटिंग के प्रति प्यार नें उन्हें आखिरकार एक पेशेवर पेंटर बना दिया। दिल्ली के बाद सरू का अगला पड़ाव मुंबई था और मुंबई में रहते हुये सरू नें उत्तराखंड को नयी पहचान दिलाई।

सरू डबराल की अधिकतर पेंटिंग्स मे आपको बरबस ही अपने पहाड का लोकजीवन और लोकसंस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इन पेंटिंग्स में यथार्थ नजर आता है। वहीं प्रकृति, पशु पक्षी, नदी झरनो, खेत खलियान से लेकर वैभवशाली सांस्कृतिक विरासत की झलक भी दिखाई देती है। सरू भले ही आज मुंबई में रहती हों, लेकिन उनके दिल और चित्रकारी में आज भी उत्तराखंड धड़कता है। सरू डबराल ने कभी भी किसी संस्थान / काॅलेज से पेंटिंग की विधिवत कोई ट्रेनिंग नहीं ली है बल्कि 2010 से शौकिया ऑयल पेंट, ऐक्रेलिक और टर कलर्स से वो खुद पेंटिग करती आ रही हैं। वहीं वे एक बेहतरीन गायिका भी हैं।

सरू का मानना है कि मेरे पहाड़ हमेशा मुझे कुछ अलग करने की प्रेरणा देते हैं। उत्तराखंड से हजारों किलोमीटर दूर रहने के बाद भी मुझे मेरी माटी की यादें बरबस अपनी और खींच लेती है।

वास्तव मे देखा जाय तो अपने उत्तराखंड से हजारों किलोमीटर दूर रहने के बाद भी सूर डबराल का अपनी माटी को पेंटिंग्स के जरिए नयी पहचान देने की कयावद बेहद सराहनीय और अनुकरणीय है। उम्मीद की जानी चाहिए की आने वाले दिनों मे वे ऊचाईयो को छुंये और उत्तराखंड का भी नाम रोशन करें!


ग्राउंड जीरो से संजय चौहान!

सरू डबराल जी को हमारी ओर से ढेरों बधाईया!

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Post source : संजय चौहान

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